Thursday , July 18 2019

LITERATURE

दोनो मिलकर ख़ूब रोये हैं अपने हिन्दुस्तान मे

            दर्द मोहम्मद साहब का महसूस किया श्री राम ने , दोनो मिलकर ख़ूब रोये हैं अपने हिन्दुस्तान मे। जैशे मोहम्मद नाम रखा था पहले दहशतगर्दों ने, नये आतंकी ज़ुल्म शुरु करते हैं जय श्री राम से। – नवेद शिकोह

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Video : दुनिया का एकमात्र बल्लेबाज जो नहीं लेता मैच खेलने के पैसे, वजह जानकर आप भी हैरान रह जायेंगे

हाशिम अमला – दुनिया में सभी क्रिकेट खिलाड़ियों की फीस के बारे में तो आप सभी जानते हैं कि एक छोटे से छोटा खिलाड़ी भी कई करोड़ रुपए लेता है, खास तौर से भारतीय खिलाड़ी आईपीएल के दौरान. इस साल भी आईपीएलसीज़न 8 में कई भारतीय बल्लेबाज और गेंदबाज लाखों करोड़ों में …

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मुरारी महाविभाजनकारी

मुरारी महाविभाजनकारी | टाइम के मुखपृष्ठ पे फोटो अय हय रे बलिहारी || कवि ने तो पहले ही कहा था किन्तु आप नहीं माने | महात्म्य और चालीसा फिर लिख कर पड़े सुनाने || सत्ता का षड़यन्त्र देख रही जनता सब बेचारी | मुरारी महाविभाजनकारी || जाति-धर्म और ऊँच-नीच में …

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अपनी बुद्धिमता का परिचय देते हुये देश के लिये एक योग्य व्यक्ति को चुनें …….

जाति-पाति , धर्म-मजहब से दूर होकर अपनी बुद्धिमता का परिचय देते हुये देश के लिये एक योग्य व्यक्ति को चुनें ……. चुनावी मौसम बा दिमाक के दिया जला के रखीहा अपने के बहरूपियन के माया से छुपा के रखीहा एकही दिन में पाँच साल के लिये कमा लेही सब चखना …

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आज इसका जन्मदिन मनाने चला….

तात का फर्ज मैं तो निभाने चला आज इसका जन्मदिन मनाने चला बेटा-बेटी में फर्क हमको आता नहीं अपनी गुड़िया को मैं तो सजाने चला अपनी बातों से सबको मनाती है वो दर्द अपना भी मैं तो भुलाने चला चीं चीं करती है चिड़ियों सी चारो तरफ बात इसकी ये …

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सुना है कि अब मैं पत्रकार हो गया हूं…

सुना है कि अब मैं पत्रकार हो गया हूं ना समझ था पहले समझदार हो गया हूं। बहुत गुस्सा था इस व्यवस्था के खिलाफ अब उसी का भागीदार हो गया हूं। दिल पसीजता था राह चलते हुए पहले कलम हाथ में आते ही दिमागदार हो गया हूं। कभी नफरत थी …

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रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है….

रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है रात ख़ामोश है रोती नहीं हँसती भी नहीं.. कांच का नीला सा गुम्बद है, उड़ा जाता है ख़ाली-ख़ाली कोई बजरा सा बहा जाता है .. चाँद की किरणों में वो रोज़ सा रेशम भी नहीं चाँद की चिकनी डली है कि घुली जाती …

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हमारी अपनी बात को सुनता कौन है अब…..

हमारी अपनी बात को सुनता कौन है अब जहां देखो लोग अपनी धुनी रमाये हैं अब दुखों का देखो गर्म बाज़ार है अब नफरत के बीच सहमा सौहार्द है अब किसी को किसानों का दर्द दिखता है अब किसी को युवाओं का मर्म दिखता है अब नोटबंदी, जीएसटी ने कितनों …

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शांति का अभिनंदन

नफरत की मौत और मोहब्बत की नई जिंदगी का अभिनंदन सिसकती अशांति के अंधेरों में पैदा होती शांति के उजाले की किरण का अभिनंदन अभिनंदन नई सुबह का जिसने अंधेरे छांट दिये जिसने विध्वंस टाल दिये मौत की उड़ान भरती नफरत की सियासत के पंख काट दिये अभिनंदन जिन्दगी का …

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जंग ना होने देंगे, हम जंग ना होने देंगे !!

जंग ना होने देंगे, हम जंग ना होने देंगे !! हमें चाहिए शांति, ज़िन्दगी हमको प्यारी  हमें चाहिए शांति, सृजन की है तयारी ! हमने छेड़ी जंग भूख से बीमारी से, आगे आकर हाथ बढाए दुनिया सारी, हरी भरी धरती को खुनी रंग न लेने देंगे ! जंग न होने …

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