Saturday , September 21 2019

SHAYARI

नज़र अख़्लाक के वो पुर संकू मंज़र नहीं आते 

नज़र अख़्लाक के वो पुर संकू मंज़र नहीं आते गले में बांह डाले श्याम और अख़्तर नहीं आते । खिलौने भी है सहमे से उदासी उनके छाई है उन्हें अब खेलने बच्चे सभी मिल कर नहीं आते । न बच्चों में बहलता है न चौकें में किसी का दिल वो …

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दोनो मिलकर ख़ूब रोये हैं अपने हिन्दुस्तान मे

            दर्द मोहम्मद साहब का महसूस किया श्री राम ने , दोनो मिलकर ख़ूब रोये हैं अपने हिन्दुस्तान मे। जैशे मोहम्मद नाम रखा था पहले दहशतगर्दों ने, नये आतंकी ज़ुल्म शुरु करते हैं जय श्री राम से। – नवेद शिकोह

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अपनी बुद्धिमता का परिचय देते हुये देश के लिये एक योग्य व्यक्ति को चुनें …….

जाति-पाति , धर्म-मजहब से दूर होकर अपनी बुद्धिमता का परिचय देते हुये देश के लिये एक योग्य व्यक्ति को चुनें ……. चुनावी मौसम बा दिमाक के दिया जला के रखीहा अपने के बहरूपियन के माया से छुपा के रखीहा एकही दिन में पाँच साल के लिये कमा लेही सब चखना …

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सुना है कि अब मैं पत्रकार हो गया हूं…

सुना है कि अब मैं पत्रकार हो गया हूं ना समझ था पहले समझदार हो गया हूं। बहुत गुस्सा था इस व्यवस्था के खिलाफ अब उसी का भागीदार हो गया हूं। दिल पसीजता था राह चलते हुए पहले कलम हाथ में आते ही दिमागदार हो गया हूं। कभी नफरत थी …

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फर्क सिर्फ इतना है!

सभी इन्सान है मगर फर्क सिर्फ इतना है! कुछ जख्म देते है,कुछ जख्म भरते है!! हमसफर सभी है मगर फर्क सिर्फ इतना है! कुछ साथ चलते है,कुछ छोड जाते है!! प्यार सभी करते है मगर फर्क सिर्फ इतना है! कुछ जान देते है, कुछ जान लेते है!! दोस्ती सभी करते …

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कलीम आजिज़ की ग़ज़ल: दामन पे कोई छींट…

मेरे ही लहू पर गुज़र-औक़ात करो हो मुझ से ही अमीरों की तरह बात करो हो दिन एक सितम एक सितम रात करो हो वो दोस्त हो दुश्मन को भी तुम मात करो हो हम ख़ाक-नशीं तुम सुख़न-आरा-ए-सर-ए-बाम पास आ के मिलो दूर से क्या बात करो हो हम को …

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कराची लाहौर औ कश्मीर : अजमल सुल्तानपुरी

मुसलमाँ और हिन्दू की जान कहाँ है मेरा हिन्दुस्तान मैं उस को ढूँढ रहा हूँ मेरे बचपन का हिन्दुस्तान न बंगलादेश न पाकिस्तान मेरी आशा मेरा अरमान वो पूरा पूरा हिन्दुस्तान मैं उस को ढूँढ रहा हूँ वो मेरा बचपन वो स्कूल वो कच्ची सड़कें उड़ती धूल लहकते बाग़ महकते …

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कराची लाहौर औ कश्मीर : अजमल सुल्तानपुरी

मुसलमाँ और हिन्दू की जान कहाँ है मेरा हिन्दुस्तान मैं उस को ढूँढ रहा हूँ मेरे बचपन का हिन्दुस्तान न बंगलादेश न पाकिस्तान मेरी आशा मेरा अरमान वो पूरा पूरा हिन्दुस्तान मैं उस को ढूँढ रहा हूँ वो मेरा बचपन वो स्कूल वो कच्ची सड़कें उड़ती धूल लहकते बाग़ महकते …

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