Sunday , May 26 2019

अंगदान कर भाई ने बचाया बहन का सुहाग, 11 घंटे चला लिवर ट्रांसप्लांट ऑपरेशन

दूसरी बार लिवर प्रत्यारोपण कर केजीएमयू के खाते में एक और उपलब्धि गुरुवार को दर्ज हुई। सुबह सात बजे से शुरु हुआ ऑपरेशन शाम पांच बजे खत्म हुआ। डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज की हालत स्थिर है।  अभी वह बेहोश है, उसे आईसीयू में रखा गया है। जबकि लिवर देने वाला युवक होश में आ गया है। डॉक्टरों की टीम बराबर दोनों पर नजर रखे हुए है। मरीज के लिए 72 घंटे अहम हैं। आलमबाग निवासी नवीन बाजपेई (45) लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे। उनका लिवर काफी खराब हो चुका था। कुछ माह पहले गंभीर हाल में मरीज को केजीएमयू लाया गया। यहां गेस्ट्रो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अभिजीत चंद्रा ने मरीज की जांच पड़ताल बाद प्रत्यारोपण ही विकल्प बताया था। परिवार की रजामंदी और नवीन के साले का लिवर प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त पाए जाने पर सर्जरी की तैयारी शुरू की गई। डॉ. चंद्रा के मुताबिक, मरीज को दस दिन पहले वार्ड में भर्ती किया गया था। पांच दिन मरीज को विशेष प्रोटोकॉल में रखा गया। मरीज की मेडिकल हिस्ट्री बनाई गई और बृहस्पतिवार सुबह सात बजे प्रत्यारोपण शुरू किया गया।

केजीएमयू

डॉ. चंद्रा के मुताबिक, लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत बताते हुए परिवार के सदस्यों की काउंसलिंग की गई। मरीज की पत्नी, बहन व अन्य सदस्य राजी भी हो गए, लेकिन किसी न किसी वजह से उनका लिवर नहीं लिया जा सकता था। परिवार के छह अन्य सदस्यों की जांच की गई, लेकिन उनका लिवर भी प्रत्यारोपण के लायक नहीं था। आखिर में मरीज के साले पवन तिवारी (35) को प्रत्यारोपण के लिए फिट पाया गया। पवन के राजी होते ही आगे की प्रक्रिया शुरू की गई। अब तक जितने भी अंग प्रत्यारोपण हुए हैं, उसमें मां-बाप व पत्नी-पति ने ही अंगदान किया है।

डॉ. अभिजीत चंद्रा के मुताबिक, लिवर दो प्रमुख हिस्सों में होता है, एक राइट लोब, दूसरा लेफ्ट लोब। मरीज में लिवर प्रत्यारोपण के लिए डोनर साले का राइट लोब निकाला गया। इसमें 35 फ ीसदी लिवर का हिस्सा लेकर मरीज को प्रत्यारोपित किया गया है।

सात लाख रुपये का आया खर्च
केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि प्रत्यारोपण में करीब सात से आठ लाख रुपये खर्च आया है। पीजीआई में 14 से 15 लाख रुपये खर्च होते हैं, जबकि निजी अस्पतालों में 40 लाख रुपये के करीब खर्च आता है।

प्रत्यारोपण में शामिल रहे ये डॉक्टर- सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. विशाल गुप्ता, डॉ. प्रदीप जोशी, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मोहम्मद परवेज, डॉ अनीता मलिक, डॉ. तन्मय तिवारी एवं डॉ. एहसान, रेडियोलोजी विभाग के डॉ. नीरा कोहली, डॉ. अनित परिहार, डॉ. रोहित, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की डॉ. तुलिका चंद्रा, माइक्त्रसेबायोलॉजी विभाग की डॉ. अमिता जैन, डॉ. प्रशांत, डॉ. शीतल वर्मा एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एस एन शंखवार। मैक्स हॉस्पिटल के डॉ. सुभाष गुप्ता व उनकी टीम के डॉ. राजेश डे, डॉ. शालीन अग्रवाल समेत अन्य सर्जन।

केजीएमयू

आईएलबीएस संस्थान से सहयोग नहीं
भारत सरकार के उपक्रम इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलेरी डीजीज नई दिल्ली के संस्थान से केजीएमयू ने किनारा कस लिया है। केजीएमयू प्रशासन निजी संस्थान के सहयोग से ट्रॉसप्लांट कर रहा है। जबकि इस संस्थान में लिवर ट्रांसप्लांट में एमसीएच व एनेस्थिसिया में डीएम का शिक्षण कार्य होता है। केजीएमयू प्रशासन का तर्क कि आईएलबीएस संस्थान के डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट में सहयोग करने से मना कर दिया था। वहीं केजीएमयू में निकाले गए लिवर को इसी संस्थान में पहले भेजा जा चुका है।

14 मार्च को मिली थी पहली सफलता 
केजीएमयू में पहला लिवर प्रत्यारोपण 14 मार्च को मैक्स हास्पिटल व केजीएमयू की टीम ने मिलकर किया था। करीब 13 घंटे तक प्रत्यारोपण की प्रक्रिया हुआ था। प्रत्यारोपण के कुछ ही दिन बाद मरीज स्वस्थ हो गया था। जिसके बाद डॉक्टरों ने दूसरा प्रत्यारोपण करने का फैसला लिया था।

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