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SBI ने मार्च-अप्रैल में बेचे 3600 करोड़ से ज्यादा के चुनावी बॉन्ड

साल 2017-18 के बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चुनावी बॉन्ड लाने की घोषणा की थी. यह करंसी नोट की तरह ही होता है जिसके ऊपर इसकी कीमत लिखी होती है. पारदर्शिता बनाए रखने के लिए चंदा देने के लिए इस बॉन्ड का उपयोग किया जाता है.

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 3,622 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड (इलेक्ट्रोल बॉन्ड) बेच दिए हैं. ये आंकड़ा एक आरटीआई के जवाब में मिला है. पुणे के विहार दुर्वे को बैंक की ओर से मिले आरटीआई के जवाब में बताया है कि इस साल मार्च में 1,356.37 करोड़ और अप्रैल में 2,256.37 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचे गए है. आपको बता दें कि किसी राजनीतिक पार्टी को चंदा देने के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bonds) यानी चुनावी बॉन्ड खरीदे जाते हैं. चुनावी बॉन्ड योजना को राजनीतिक चंदे के लिए नकदी के एक विकल्प के रूप में पेश किया गया है. राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में पारर्दिशता लाने के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई है. आपको बता दें कि चुनावी बॉन्ड खरीदकर किसी पार्टी को देने से ‘बॉन्ड खरीदने वाले’ को कोई फायदा नहीं होगा. न ही इस पैसे का कोई रिटर्न है. ये पैसा पॉलिटिकल पार्टियों को दिए जाने वाले दान की तरह है.

कौन सी पार्टियों को मिलता है बॉन्ड का पैसा- 1951 ऐक्ट के सेक्शन 29A के तहत रजिस्टर हई पार्टियों को बॉन्ड के तहत पैसा मिलता है. वहीं, आम चुनाव में कम से कम कुल वोट के एक प्रतिशत वोट मिलने वाली पार्टी इसमें शामिल हो सकती है.

चुनावी बॉन्ड- साल 2017-18 के बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चुनावी बॉन्ड लाने की घोषणा की थी. यह करंसी नोट की तरह ही होता है जिसके ऊपर इसकी कीमत लिखी होती है. पारदर्शिता बनाए रखने के लिए चंदा देने के लिए इस बॉन्ड का उपयोग किया जाता है. ये चुनावी बॉन्ड 1,000 रुपये, दस हजार रुपये, एक लाख, दस लाख और एक करोड़ रुपये के मूल्य के उपलब्ध हैं.

बॉन्ड में तीन खिलाड़ी

दूसरा- देश के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दल.
तीसरा- देश का केन्द्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया.

बॉन्ड की मियाद 15 दिनों की होती है, यानी खरीदने के 15 दिन बाद पॉलिटिकल पार्टी को बॉन्ड दे देना है वो भी पंजीकृत राजनीतिक दल को. पार्टी भी इन्हें सिर्फ अधिकृत बैंक खाते के जरिए ही भुना सकेगी. खरीदने वाले का KYC जरुरी होगा. ये बॉन्ड उन्हीं पंजीकृत राजनीतिक दलों को दिए जा सकेंगे जिन्हें पिछले चुनाव में कम से कम एक फीसदी वोट मिला.

चुनाव बॉन्ड के मामले में मुंबई सबसे आगे हैं जहां 694 करोड़ के बॉन्ड बिके. इसके बाद कोलकाता और नई दिल्ली का नंबर आता है.

>> यह बॉन्ड एसबीआई की चुनिंदा शाखाओं में उपलब्ध होता है. वित्त मंत्रालय से नोटिस जारी होने के बाद ही इसे खरीदा जा सकता है.

>> 2018 में केंद्र सरकार की इस योजना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी.

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