Saturday , July 20 2019

अमेरिका-चीन की इस लड़ाई में भारत को होगा ये बड़ा नुकसान! आम आदमी पर बढ़ेगा ये बोझ

अमेरिकी की ओर से जारी ट्रेड वॉर के असर से भारतीय रुपये में कमज़ोरी बढ़ने लगी है. एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 2 महीने के निचले स्तर 70.50 पर आ गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर चीन और अमेरिका में ट्रेड वॉर और गहराती है तो भारत के रुपये में तेज़ गिरावट आ सकती है. आपको बता दें कि पिछले छह महीने में भारतीय रुपया दुनिया में सबसे ज्यादा मज़बूत होने वाली करेंसी थी. वहीं, पिछले साल ट्रेड वॉर जैसे हालात में चीन की करेंसी युआन में 11 मई से 31 अक्टूबर के बीच 10 फीसदी की गिरावट आई थी और डॉलर की तुलना में रुपया भी इतना ही कमजोर हुआ था. भारत में निवेश करने वालों को लग रहा है कि फिर से वैसा ही होने जा रहा है. पिछले साल 11 अक्टूबर को डॉलर के मुकाबला रुपया 74.48 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था.

रुपये की कमजोरी के पीछे-भारतीय करंसी पर चुनाव संबंधी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने से भी बुरा असर पड़ रहा है.

>> विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने 2,555 करोड़ रुपये निकाले हैं, जबकि एक महीना पहले उन्होंने 16,728 करोड़ का निवेश किया था.

क्यों कमज़ोर होगा रुपया- एक्सपर्ट्स बताते हैं कि चीन की करेंसी युआन और रुपये की वैल्यू के बीच एक्सपोर्ट की वजह से सीधा रिश्ता है. युआन की वैल्यू में उतार-चढ़ाव होता है तो रुपया उससे बेअसर नहीं रह सकता.

>> अगर चीन की करंसी कमजोर होती है और रुपये की वैल्यू उसके मुताबिक नहीं गिरती तो देश के निर्यातकों को नुकसान होगा. ऐसे  में पूरी संभावना है कि भारतीय रुपया कमजोरी का नया रेकॉर्ड बना सकता है कि क्योंकि डॉलर के मुकाबले युआन में कमजोरी आ रही है.

लेकिन मज़बूत सरकार से संभल सकता है रुपया- चीन में आर्थिक मंदी की वजह से अगर युआन की वैल्यू घटती है तो रुपये पर भी उसका असर होगा.  लेकिन केंद्र में स्थायी सरकार बनती है तो इससे भारत की मैक्रो-इकॉनमी के लिए अच्छे हालात बनेंगे. तब रुपया कुछ स्थिर रह सकता है.

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