Saturday , August 24 2019

तीसरा अशरा शुरू, शबे कद्र पर होगी विशेष नमाज

इबादतों और बरकतों का महीना रमजान अब अपनी मंजिल के दूसरे पायदान पर पहुंच चुका है। इसे दूसरा अशरा (दस दिन का) कहते हैं। यह अशरा मगफिरत यानी छुटकारे और मुक्ति का है। अल्लाह से गुनाहों की माफी, बख्शीश और निजात मिलती है। रविवार को रमजान माह के 20 रोजे पूरे हो गए। इस दिन मगरीब की नमाज के साथ ही तीसरा अशरा शुरू हो चुका हैं। समाजजन अब मस्जिद में रहकर ऐतकाफ की इबादत में लग चुके हैं।

तीन अशरे में बंटा है रमजान

मुकद्दस रमजान माह तीन अशरे (खंड) में बंटा है। पहला रहमत, दूसरा मगफिरत व तीसरा जहन्नाम की आग से बचने का। इनमें 1 से 10 रोजे तक रहमत के होते हैं, जिसमें गरीबों, यतीमों की मदद की जाती है। ज्यादा से ज्यादा खैरात-जकात दी जाती है। 11 से 20 रोजे तक मगफिरत के इसमें इबादत कर गुनाहों से माफी मांगी जाती है। 21 से 30 रोजे तक जहन्नाम की आग से बचने का है। इस आखिरी अशरे में कई मुस्लिम मर्द और औरतें एतकाफ में बैठते हैं। रमजान में की जाने वाली इबादतों में से एक एतकाफ भी है। एतकाफ के लिए मुसलमान पुरुष रमजान के आखिर के 10 दिनों तक मस्जिद के किसी कोने में बैठकर इबादत करते हैं और खुद को परिवार व दुनिया से खुद को अलग कर लेते हैं।

एतकाफ का महत्व

यूं तो रमजान का पूरा महीना ही पवित्र और अहम होता है, लेकिन इस महीने के आखिर के 10 दिन सबसे अहम और रहमत वाले होते हैं। इस्लाम धर्म के लोगों का मानना है रमजान के आखिर में एतकाफ में बैठने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है। हदीस में बताया गया है कि रमजान में पैगंबर मोहम्मद भी एतकाफ में बैठा करते थे। इस्लामिक मान्यता के मुताबिक, एतकाफ में बैठकर इबादत करने वाले लोगों को अल्लाह सभी गुनाहों (पापों) से मुक्त कर देता है।

बढ़-चढ़कर भाग ले रहे युवा

रमजान में हर जगह बड़े-बुजुर्ग ही एतेकाफ की इबादत करते है, लेकिन नगर में पिछले 4-5 वर्षो से युवा वर्ग भी एतेकाफ की इबादत कर रहे है। दीन के लिए युवाओं का रुझान बढ़ा, जो तारीफ-ए-काबिल है। इस वर्ष भी पंपावती नदी किनारे स्थित मस्जिद में कई युवा एतेकाफ की इबादत में लगेंगे। 20 रोजे पूरे होने के साथ ही ईद के लिए बाजार सज गए हैं। बाजार में सूखे मेवे की दुकानें सज गई हैं। मस्जिदों में देर रात तक रमजान की रौनक दिखाई दे रही है। समाजजन भी ईद की तैयारियों में जुट गए है। ईद के आने की खुशी का उत्साह बड़ों के साथ बच्चो में ही नजर आ रहा है।

रमजान में इन रातों में होती है बरकत वाली रात

रमजान के महीने में एक रात ऐसी भी आती है, जिसका सवाब सत्तर साल की मकबूल इबादत के बराबर होता है। शहर के इमाम अब्दुल खालिक साहब ने बताया कि यह रात अधिकतर ताक रातों 21, 23, 25, 27, 29 रमजान की रात में पाई जाती है। पवित्र माह रमजान की पहली बरकत वाली रात रविवार को हो चुकी है। रात जानने वाले रातों को जागकर इस रात को ढूंढते हैं। इस रात की निशानियों में यह है कि पेड़ भी सजदा करते हैं और समुन्दर का खारा पानी भी मीठा लगता है। चरिन्द-परिन्द सभी खामोश रहते हैं। एक अजीब तरह का सुकून फजा में महसूस किया जाता है।

शबे कद्र रहेगी अहम

रमजान के 26 वें दिन 1 जुन को बड़ा रोजा रहेगा। यह दिन सभी के लिए अहम रहेगा। इस दिन को शबे कद्र का दिन कहा जाता है। इस दिन तरावीह के दौरान पढ़ा जा रहे कुरान की तिलावत पूरी होगी। शबे कद्र की रात समाजजन मस्जिदों और घरों में रात जागकर इबादत करेंगे। इस दौरान विशेष नमाजें और दुआएं की जाएंगी।

एतकाफ के दौरान इन चीजों का ध्यान रखें

एतकाफ में बैठने वाले पुरुष या महिला को अपना ज्यादातर वक्त इबादत में गुजारना चाहिए। पुरुष केवल मस्जिद में रहकर ही एतकाफ कर सकते हैं, जबकि महिलाएं घर के किसी कोने में पर्दा लगाकर एतकाफ करती हैं। एतकाफ में बैठने वाले लोगों को साफ-सफाई का खास ख्याल रखना चाहिए। एतकाफ के दौरान किसी की बुराई करने या लड़ाई-झगड़ा करने से बचना चाहिए। मौजूदा वक्त में मोबाइल सबकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। ऐसे में एतकाफ में बैठने वाले शख्स को मोबाइल से भी खुद को दूर रखकर पूरा वक्त इबादत में गुजारना चाहिए।

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