Saturday , August 24 2019

नबी करीम सल्ला० ने बकरीद को लेकर दिया यह फरमान….

मुसलमानों का पवित्र त्यौहार ईद उल जुहा के कुछ ही दिन ही बची हैं। जिसके चलते बाजारों में अभी से रौनक नजर आने इस मौके पर बाजारों मे खूब रौनक और चहल पहल बढ़ गई है। ईद उल अजहा के मौके पर अल्लाह के सामने मुसलमान मोमीन चौपाया जानवरों की कुर्बानी देते हैं और अल्लाह के सामने अपनी कुर्बानी कबूल करने की दरख्वास्त करते हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में जिल्हाज का महीना शुरू हो चुका है। इस्लाम में ये महीना बहुत ही बरकतों वाला माना जाता है। इसी पाक महींने मे हज मुक्कमल किया जाता हैं। हज इस्लाम के स्तम्भों मे से एक है तथा हज हर मुसलमान मोमीनो पर फर्ज है। अल्लाह के नेक बदें अल्लाह के इन इह’का’मो को पूरा करते है। अ’ल्ला’ह की खुशनुदी के लिए अपनी आजीज़ चीजों की कुर्बानी करते हैं।

ये त्यौहार कुर्बानी का ही है। अल्लाह और अल्लाह के रसुल सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम ने हमें जो कुर्बानी का ढंग और सलीका सिखाया। हम सब मोमीन उन्हें और उनकी ही बातों को ही मानते हैं। लेकिन अल्लाह की राह मे कुर्बानी देने से पहले कुर्बानी के लिए जानवरों मे बहुत सारी खू’बि’यां होती है। जिन्हे घ्यान मे रखकर हमे कुर्बानी के लिए जानवर खरीदना चाहिए। कुर्बानी के लिए भैंस, गाय ,बकरे, ऊंट तथा दुम्बा आदि जानवरों की कुर्बानी दी जाती हैं।

इस्लाम में बताया जाता है कि कुर्बानी करने से पहले जानवरो मे ये खासि्यत होना जरुरी है। आईये आपको बताते हैं कि ऐसी कौन सी खासियत है जिसे कुर्बानी के लिए जानवर खरीदते वक़्त ध्यान देना चाहिए। कुर्बानी वाला जानवर को बालिग होना जरूरी है। आपको बता दें कि कुर्बानी के जानवरो को एक दम स्वस्थ होना चाहिए तथा किसी तरह की बीमारी नही होना चाहिए।

जानवर का कोई अंग टूटा फूटा या किसी तरह का भी ऐब नही होना चाहिए। सींग, पैर और दूसरे सभी तरह के अंग ठीक ठाक से होना चाहिए। इसके आलावा रियाकारी से भी बचना चाहिए बहुत सारे ऐसे मुसलमान होते है। जोकि कुर्बानी का जानवर खरीदते है और सभी को दिखाते है और ना ज़ करते है। लोगों को बताते हैं कि फ’ला’ना से लिया और की’म’त भी बताते हैं। हमे इन सभी खराब बातों से परहेज करना चाहिए।

गौरतलब है कि कुर्बानी होने के बाद जानवर को गोश्त को तीन हिस्सों मे बाँट देना चाहिए। एक हिस्सा गरीब को एक हिस्सा रिश्तेदारों को और एक हिस्सों खुद के पास रखना चाहिए। इसके साथ बेकार हुए कुर्बानी के गोश्त को जमीन मे गाढ़ देना चाहिए ताकि उनकी बेहुरमती ना हो।

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