Saturday , August 24 2019

अपीलः माहौल को देखते हुए कुर्बानी का मीट बांटने का रिवाज खत्म करे मुस्लिम समाज- मौलाना

ईद-उल-जोहा यानी बकरीद को देखते हुए इसबार मुस्लिम समाज में एक चर्चा खास तौर पर हो रही है. यह चर्चा कुर्बानी देने वाले जानवर के मीट (मांस) को लेकर है. यह चर्चा शुक्रवार से, जुमे की नमाज के बाद शुरू हुई है. जुमे को दी जाने वाली तकरीर में मौलानाओं ने अपील की है कि कुर्बानी का गोश्त एक दूसरे के यहां लाने-ले जाने का रिवाज खत्म किया जाये.

कुर्बाना का गोश्त बांटने के रिवाज से ही परहेज बरतें तो अच्छा होगा. गौरतलब है कि कुर्बानी का गोश्त एक-दूसरे के यहां बांटे जाने का रिवाज है. कहा गया है कि वे मुसलमान जिनके यहां कुर्बानी हुई है, वे उन घरों तक कुर्बानी का गोश्त पहुंचाये, जिनके यहां किसी कारणवश कुर्बानी नहीं हुई है.

हाल के दिनों में घटी घटनाओं पर चिंता

इसे लेकर रांची शहर में मौलवियों ने शुक्रवार को समाज के लोगों से अपील की है कि वे अपने परिवार और  दोस्तों के बीच कुर्बाने के गोश्त को बांटने का रिवाज खत्म करें. यह अपील उन घटनाओं के मद्देनजर की गयी है कि जो पिछले महीनों में मवेशी और मांस को लाने- ले जाने के दौरान हुई हैं. इस अपील में मुसलमानों से दूसरे मजहब के लोगों की भावनाओं का सम्मान करने की बात कही गयी है. खासतौर पर यह अपील  हज़रत कुतुबुद्दीन रिसालदार बाबा मजार, रांची की ओर से की गयी है. इस अपील में लोगों से सार्वजनिक नालियों में जानवरों के खून को बहाने से भी रोका गया है. कहा है कि कुर्बानी के जानवर के अपशिष्ट को खुले में न फेंके.

इसका निपटारा कुर्बानी वाली जगह पर ही किया जाना चाहिये. मौलवियों ने कहा है कि कच्चा गोश्त बांटने के बदले पकाया हुआ गोश्त खाने के लिए लोग अपने परिजनों, दोस्तों को अपने घर पर आमंत्रित करें. अपील में मॉब लिंचिंग और भीड़ के नापाक के इरादों से मुस्लिम समाज को बचने के लिए कहा गया है. मुस्लिम रिवाज के मुताबिक कुर्बानी यानी जानवर के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है. एक अपने परिवार दूसरे दोस्तों या पड़ोसियों के लिए और एक समाज में गरीबों के लिए.

सावन की अंतिम सोमवारी के दिन मनाया जाना है बकरीद त्योहार

इस बारे में शाह क़ाज़ी कारी जान मोहम्मद मुस्तफ़ी ने कहा कि जुमे की नमाज के बाद शहर की विभिन्न मस्जिदों से इसी तरह की अपील की गयी है. क्योंकि मुस्लिम समाज नहीं चाहता है कि कुर्बानी के बहाने से किसी तरह की अप्रिय घटना का किसी को मिले. और कानून-व्यवस्था बिगड़े. उन्होंने आगे कहा, इस साल कुर्बानी का पर्व सावन की अंतिम सोमवारी के साथ मनाया जायेगा. इस बहाने हम एक बेहतर सामाजिक सौहार्द्र की मिसाल पेश कर सकते हैं.

माहौल बिगाड़ने के फिराक में रहते हैं कुछ असामाजिक तत्व

कुर्बानी को लेकर इसी तरह की अपील रांची के डोरंडा मस्जिद से भी की गयी है. मस्जिद के मौलान सैय्यद अलकुमा सिबली ने कहा है कि इस जटिल घड़ी में सावधानी बरतने की जरूरत है. क्योंकि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अफवाह फैलाने और सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित करने की कोशिश लगातार जारी है.

उनका कहना है कि ऐसे मौकों पर सरकार राजनीतिक रूप से और पुलिस कानूनी रूप से सतर्क रहता है, लेकिन हम इस बात को लेकर आशंकित रहते हैं कि नापाक इरादों वाले लोग माहौल बिगाड़कर परेशानी पैदा करने की कोशिश में रहते हैं. इसलिए कुर्बानी का गोश्त लेकर मुसलमान यहां-वहां नहीं जायें तो बेहतर होगा.

कानून-व्यवस्था की तैयारी पर क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी

कुर्बानी को लेकर मुसलमानों की चिंता को उचित ठहराते हुए पुलिस महानिरीक्षक और राज्य पुलिस प्रवक्ता आशीष बत्रा ने कहा है कि कुर्बानी को लेकर हम सतर्क हैं. हमें इत्मीनान से नहीं बैठेंगे. पुलिस सभी की भावनाओं का ख्याल रखने के लिए है. हमने इस दिन सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी देने के लिए वीडियो-कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी एसपी के साथ एक बैठक बुलायी है.

About Voice of Muslim

SUPPORT US

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com