Thursday , December 12 2019

योगी सरकार तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को सुविधाएं देने का किया ऐलान

 

Syed Akhtar Ali

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में जब उद्घोषिका ने माइक पर बाँदा की रहने वाली रूबीना का नाम पुकारकर मंच पर दीप प्रज्ज्वलित करने के लिए बुलाया तो तालियों की गड़गड़ाहट से आडीटोरियम गूंज उठा,,,

मेरे ज़हन में अचानक लगभग दो साल पहले का वह दृश्य घूम गया। वह “22 दिसंबर 2017” की एक गुनगुनी ठंड से भरी शाम थी। होटल ताज विवांता के क्रिस्टल हाल में तिल रखने की जगह नहीं थी। मौका था एक निजी चैनल के लखनऊ एडिशन के विमोचन समारोह का।

समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने तीखे तेवर से माहौल को गर्मा रहे थे। उन्होंने अपने संबोधन के दरम्यान “हरा वायरस” का ज़िक्र भी किया था। वहां पर देश के नामी-गिरामी पत्रकार की मौजूदगी में राज्य सभा सांसद सुभाष चंद्रा चैनल ने मुख्यमंत्री का साक्षात्कार लिया था। पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत, योग गुरू बाबा रामदेव, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व डॉ. दिनेश शर्मा, राज्य सभा सदस्य अमर सिंह व विवेक तंखा की उपस्थिति में राज्य सभा सांसद व चैनल मालिक सुभाष चन्द्रा ने योगी आदित्यनाथ को मुस्लिम समुदाय के साथ वार्तालाप शुरू करने और उन्हें विश्वास में लेने की सलाह दिया था। जिसका असर आज देखने को मिला।

अब आते हैं आज होने वाले आयोजन पर। राजधानी स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान का आडीटोरियम मुस्लिम महिलाएं जिनमें अधिकतर बुर्कानशी थी, से खचाखच भरा हुआ था। महिलाओं के चेहरे से आत्मविश्वास टपक रहा था। सूबे के अलग-अलग जनपदों से अपने रिश्तेदारों संग आई तीन तलाक पीड़ित महिलाओं ने अपने संग बीती दास्तान सुनाई तो माहौल गमगीन हो उठा।

रहमत उम्र 28 वर्ष करोला, जयंतीपुर चौराहा, मुरादाबाद से आई थीं। इनके शहर शाकिर शराब पीकर आए दिन झगड़ा करता था। उसने 2018 में रहमत को तलाक दे दिया। रहमत फिलहाल अपने मायके में रहती हैं, इनके अब्बा का इंतकाल हो चुका है और माँ बीमार रहती हैं। बहुत मुश्किल से यह अपनी जिंदगी काट रही हैं, इनके तीन बच्चे हैं सबसे छोटा बेटा 3 साल का है उससे बड़ा 5 साल और एक बेटी 8 साल की है।

कुछ ऐसी ही दुखभरी दास्तान वैराम, सुल्तानपुर जनपद हापुड़ की रहने वाली नसरीन की है। नसरीन का पति शादाब मजदूरी करता था। 30 जुलाई 2019 को उसने गुस्से में आकर नसरीन को तीन बार तलाक देकर घर से निकाल दिया। नसरीन की दो बेटियां हैं एक 2 साल की और 1 दूधमुंही 4 महीने की बेटी नसरीन की गोद में है। नसीम के अब्बा उमेद कहते हैं कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन तलाक पर लिए कड़े फैसले से कुछ न्याय की उम्मीद जगी है। वह कहते हैं कि जब तक मैं जिंदा हूं तब तक नसरीन को दिक्कत नहीं होने दूंगा उसके बाद उसका भविष्य क्या है यह मैं नहीं बता सकता।

दिल्ली से सटे गाजियाबाद के ग्राम पौड़ी थाना भोजपुर की रहने वाली आश्मीन के प्रति दिलशाद हाफिज ए कुरान हैं। वह मस्जिद में इमामत का काम करते हैं। 19 जुलाई 2019 की वह मनहूस शाम थी जब अचानक दिलशाद ने आश्मीन को तीन बार तलाक देकर एक झटके में उससे अपने तालुकात खत्म कर दिए। आश्मीन बताती हैं कि अचानक पति का ये रवैया देखकर मैं स्तब्ध रह गई। रिश्तेदार नातेदार किसी ने मेरी मदद नहीं की, 28 जुलाई को मैंने थाना भोजपुर जाकर दिलशाद के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करा दी।

तीन तलाक का दंश से उच्च शिक्षित महिलाएं भी पीड़ित हैं। महोबा की रहने वाली महनाज़ बी ने राजनीति शास्त्र में एम.ए. किया है। इन की दो बेटियां एक 12 वर्ष और छोटी बेटी 10 साल की है। 33 साल की उम्र में महनाज़ बी को तीन तलाक का दंश झेलना पड़ गया है। इनका पति सिगबत उल्ला खान प्रॉपर्टी डीलर हैं और ठीक-ठाक कमा लेता है। महनाज़ बी ने बताया कि सिगबत उल्ला पहले से शादीशुदा थे और हमारे घरवालों को धोखे में शादी कर लिया। 2007 में तीन तलाक देकर इन्होंने रिश्ते खत्म कर दिए। फिलहाल ये अपने मायके में रहती हैं, इनकी मां का मृत्यु हो चुकी है और मायके में पिता और तीन भाइयों के साथ रहती हैं। ऐसी अनगिनत कहानियां आज इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बिखरी हुई थी। पति की ठुकराई महिलाएं योगी के बुलावे पर आई थीं। इनकी आंखों में न्याय पाने का सुकून था। भाजपा सरकार ने इन तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को कई सुविधाएं देने का ऐलान किया है। जिसमें मुख्य हैं प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना में मुफ्त आवास, आयुष्मान योजना के तहत 500000 का मुफ्त इलाज। तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को वर्ष में ₹6000 गुजारा भत्ता मिलेगा डेढ़ महीने के अंतराल पर ₹750 इन के खाते में जमा होंगे। बेटी के विवाह के लिए ₹20000 की आर्थिक मदद सरकार प्रदान करेगी। अल्पसंख्यक कल्याण की सारी योजनाओं का लाभ तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को मिलेगा।

इनके ससम्मान जीवन यापन करने के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था सरकार करेगी। कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, प्रत्येक जिले में तीन तलाक पीड़ित महिलाओं का एक समूह बनेगा।

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