Wednesday , October 16 2019

ट्रेनिंग नियमों में बदलाव अब दोगुना मिलेगा पैसा

नई दिल्ली. सरकार ने अप्रेन्टस्शिप नियमों (1992) में बदलावों को अधिसूचित कर दिया है. इसका मकसद देश में स्किल्ड मैनपावर को बढ़ाना और प्रशिक्षुओं की स्टाइपेंड में बढ़ोतरी करना है. अप्रेन्टस्शिप (संशोधन) नियम, 2019 (Apprenticeship (Amendment) Rules, 2019) के तहत किसी प्रतिष्ठान में इंटर्न की भर्ती की सीमा को बढ़ाकर उस संस्थान की कुल श्रमता के 15 फीसदी के बराबर किया जाएगा. साथ ही इन्टर्न को दी जाने वाली मानदेय (Stipend) राशि को बढ़ाकर 9,000 रुपये मासिक तक किया जाएगा.

इसके अलावा अनिवार्य प्रतिबद्धता के तहत इन्टर्न की सेवाएं लेने के लिए किसी प्रतिष्ठान के आकार की सीमा को भी 40 से घटाकर 30 किया गया है. इसके अलावा इन्टर्न की सेवाएं लेने के इच्छुक प्रतिष्ठान के लिए इस सीमा को 6 से घटाकर 4 किया गया है.

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री (Union Minister for Skill Development and Entrepreneurship) महेंद्र नाथ पांडेय ने एक कार्यक्रम के मौके पर अलग से बातचीत में कहा कि अप्रेन्टस्शिप कानून में उल्लेखनीय बदलाव किए गए है. इसमें न्यूनतम स्टाइपेंड को दोगुना कर 5,000 रुपये से 9,000 रुपये तक मासिक किया गया है.

उन्होंने कहा कि इंटर्न्स की संख्या बढ़कर 2.6 लाख पर पहुंच जाने की उम्मीद है. अभी यह आंकड़ा 60,000 का है. मंत्री ने कहा कि देश की 8 से 10 फीसदी आबादी अब कुशल बन चुकी है, जबकि पहले यह आंकड़ा 4 से 5 फीसदी था. इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ये आंकड़े विभिन्न स्रोतों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित हैं. ये आंकड़े संगठित क्षेत्र से जुड़े हैं.

पांडेय ने कहा कि यदि इसमें असंगठित क्षेत्र को भी जोड़ दिया जाए, तो यह आंकड़ा 50 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा. नए नियमों के तहत पांचवीं से नौवीं कक्षा तक स्कूली शिक्षा प्राप्त प्रशिक्षुओं को 5,000 रुपये मासिक वृत्तिका दी जाएगा. स्नातक या डिग्रीधारी प्रशिक्षु को 9,000 रुपये तक मासिक प्राप्त होंगे.

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