Wednesday , October 16 2019

क़ुरान में सूरज डूबने का हाल तफ्सील से

आज इ’स्ला’म के न’ज’रि’ए से हम आ’प’को ,इसके बारे में वि’स्ता’र से ब’ता’एं’गे। पू’रे दि’न सू’र’ज आ’स’मा’न में च’ल’ता र’ह’ता है, फिर उ’स’के बा’द सू’र’ज डू’ब जा’ता है, ह’मा’री न’ज़’रो से ग़ा’य’ब हो जा’ता है। इस बारे में ब’हु’त ही क’म लो’ग जा’न’ते है कि सू’र’ज डू’ब’ने के बा’द क’हा जा’ता है? आ’ज आ’प’को इस बा’त की जा’न’का’री दें’गे। कु’रा’न पा’क की की सू”र’ह क’ह’फ़ में आ’या है। जु’ल’कु’र’ने’न ने सफर शु’रू किया और वो स’फ़’र क’र’ते र’हे ।

वह त’ब तक स’फ’र करते रहे जब तक सू’र’ज डू’ब’ने की जगह पर न’हीं पहुँच गए। उन्होंने सू’र’ज को एक दलदल के च’श्मे में ग़ु’रू’ब हो’ता हु’आ पा’या। इ’मा’म इ’ब’न क’सी’र इस आयत की त’फ़्सी’र में लिखते है कि जब इं’तिहाय म’गरि;ब की सि’म्त पर पहुँच गए तो ये मं’ज’र दे’खा कि गो’या ब’ह’र मु’हि’त में सू’र’ज ग़ु’रू’ब हो रहा है। जो भी किसी स’मुं’द’र के कि’ना’रे ख’ड़ा हो कर सू;’र’ज को ग़ु’रू’ब होते हुए दे’खे”गा तो ब’जा’हि’र यही मं’ज’र उंसके सा’मने होगा की गो’या सू’र’ज पा’नी मे डू’ब रहा है।

सू’र’ज चौ’थे आ’स’मा’न पर है और इससे अलग क’भी न’ही होता। सै’य्य’द’ना अ’बू’ज’र र’जि’ अ ‘ल्ल’हु’ अ’न्हा बयान करते है कि अ’ल्ला’ह के र’सू’ल स’ल्ल’ल्ला’हु अ’लै’हि व’स’ल्ल’म ने फ;र’मा’या क्या तु’झे मा’लू’म है जब सू’र’ज ग़ु’रू’ब होता है तो क’हा जा’ता है। मैं’ने क’हा ये तो अ’ल्ला’ह और अ’ल्ला’ह के र’सू’ल को इस’का इ’ल्म’ है। आपने फ’र’मा’या सू’र’ज अ’र्श के नी’चे जाकर स’ज’दा क’र’ता है। इ’जा’ज’त त’ल’ब क’र’ता है। उसे इ’जा’ज’त मि’ल जा’ती है।

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