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जानें सउदी अरब क्‍यों धड़ाधड़ हटा रहा महिलाओं पर से प्रतिबंध

सऊदी अरब की दुनिया में मानवतावाद का अगुवा बनने की चाहत

28 February
रियाद| व्यापक सुधार के साथ सऊदी अरब में बदलाव की आबोहवा तैयार हो रही है। मदद के लिए हाथ बढ़ाने की कूटनीति के जरिए अमीर किंगडम अब अपनी वैश्विक छवि में आमूल परिवर्तन के साथ दुनिया में मानवतावादी नेता के रूप में खुद का पेश करने की चाहत रखता है।

इसी प्रयास के सिलसिले में सोमवार को राजधानी में अंतर्राष्ट्रीय सहायता सम्मेलन का आगाज हुआ, जिसका मकसद सऊदी अरब को मानवतावादी चेहरे के रूप में प्रस्तुत करना है और यह दिखाना है कि इसने दुनिया को संकट से उबारने में अपना योगदान दिया है।

असलियत में देश के राजनीतिक नेता 32 वर्षीय क्राउन प्रिंस (राजकुमार) मोहम्मद बिन सलमान ने हाल ही में कई सामाजिक व राजनीतिक सुधार के कार्यक्रम शुरू किए, जिसके तहत महिलाओं को कार चलाने और खेल के मैदान में जाने की इजाजत दी गई। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए उन्होंने राजनेताओं के साथ बड़े पैमाने पर सख्ती की।

देश के लोग अब सिनेमा देखने को भी जानेवाले हैं क्योंकि सऊदी में 35 साल के प्रतिबंध के बाद सरकार ने कहा कि वह अब व्यावसायिक सिनेमाघरों को लाइसेंस देगी। यह सब रूढ़िवादी राजसत्ता में बदलाव के साथ उसे आधुनिक राज्य बनाने की कोशिश है।

लेकिन सऊदी सेना की अगुवाई में चले अभियान में पड़ोसी देश यमन में 2015 से हजारों लोगों की हत्या और कतर की घेराबंदी से इसकी तीखी आलोचना हुई है।

इसी परिप्रेक्ष्य में किंग सलमान बिन अब्दुला अजीज के मानवतावादी व राहत केंद्र (केएस रिलीफ) की ओर से अपने आप में पहला रियाद अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी मंच सम्मेलन रियाद में आयोजित किया गया।

दो दिवसीय कार्यक्रम के आयोजकों के मुताबिक, यह सम्मेलन सऊदी अरब की ओर से दुनिया में बदलाव लाने की दिशा में पहले शुरू की गई वैश्विक सहायता की पहल की अगली कड़ी है, जिसका मकसद जमीनी स्तर पर बदलाव दिखने को लेकर कार्यक्रम तय करना है। सम्मेलन का आगाज किंग सलमान (82) ने किया, जो दर्जनों सऊदी रॉयल गार्ड के बीच छड़ी के सहारे चलते हुए वहां पहुंचे थे।

किंग के राहत केंद्र के प्रमुख अब्दुला अल रबीआ ने कहा, “किंगडम अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की सेवा में मानवतावादी भूमिका का मार्ग प्रशस्त करता रहा है और मानव को यंत्रणा से निजात दिलाने में इसकी भूमिका के महत्व को महसूस करना और सबको स्वास्थ्यवर्धक व सम्मानजनक जिंदगी बसर हो यह सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सहायता व राहत केंद्र की स्थापना तीन साल पहले हुई थी। इसका मकसद किंगडम की सरहद के पार और यमन, इराक व सीरिया समेत दुनिया के हर हिस्से में सहायता व राहत प्रदान की गई है।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन राहत केंद्र के अधिदेश व मानवीय सहायता की बढ़ती राशि के लिए दुनिया की बढ़ती जरूरतों पर आधारित है। संयुक्त राष्ट्र में सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अब्दुल्ला बिन याहया अलमोआलिमी ने किंगडम और इसके सहयोगी देशों की हालिया नई पहल के तहत यमन में 1.5 अरब डॉलर की सहायता का जिक्र किया और कहा कि इससे युद्ध से प्रभावित देश में लोगों को बड़ी मदद मिलेगी।

दरअसल तेल कीमतों में लगातार गिरावट के चलते सउदी अरब की अर्थव्‍यवस्‍था की रफ्तार कुंद पड़ चुकी है। इस देश को भी अंदाजा हो चुका है कि तेल की कमाई से अब अर्थव्‍यवस्‍था को भविष्‍य में जिंदा रख पाना बहुत मुश्किल होगा। यही वजह है कि यह देश अपनी कट्टरता को भी ताक पर रख कर ऐसे-ऐसे फैसले ले रहा है कि एक दशक पहले इस इस्‍लामिक राष्‍ट्र से कोई उम्‍मीद नहीं कर सकता। ये सब दुनिया भर को एक मैसेज देना है कि सउदी अरब एक लिबरल देश है और यहां औरत हो या मर्द यहां तक रोबोट सबको आजादी से जीने का हक है।

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