Wednesday , September 19 2018

सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी मुठभेड़: एक और गवाह अपने बयान से मुकरा, अब तक 71 गवाह मुकर चुके हैं


चर्चित सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में अभियोजन का एक और गवाह अपने बयान से मुकर गया। इसी के साथ अब तक 71 गवाह मुकर चुके हैं। राकेश अधिकारी ‘पंच गवाह’( घटना स्थल पर पुलिस द्वारा तलाशी और जब्ती की गवाही देने वाला गवाह) था। इसे सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस जे शर्मा ने अपने बयान से पलटता हुआ गवाह घोषित कर दिया क्योंकि वह अपने बयान से पलट गया जो उसने 2010 में सीबीआई को दिया था। सीबीआई अदालत में उसने कहा कि उसने घटनास्थल पर कोई वीडियो शूटिंग होते हुए नहीं देखी थी और सीबीआई ने उसे जो बयान दिया था उसने बिना पढ़े उस पर उसने हस्ताक्षर कर दिए थे।

पुलिसकर्मियों को आरोपमुक्त करने के खिलाफ याचिकाओं की चार जुलाई से होगी सुनवाई

बंबई उच्च न्यायालय सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले के आरोपी कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को आरोपमुक्त किए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर चार जुलाई से फिर सुनवाई शुरू करेगा।  दरअसल , सोहराबुद्दीन के भाई रूबाबुद्दीन की तीन याचिकाओं और सीबीआई की दो याचिकाओं पर पूरी तरह से सुनवाई नहीं हो पाई थी। फरवरी में अचानक ही उच्च न्यायालय के कुछ न्यायाधीशों का काम बदल दिए जाने की वजह से ऐसा हुआ था।
 हालांकि , याचिकाकर्ता और प्रतिवादियों (आरोपमुक्त पुलिस अधिकारियों) के वकीलों ने आज न्यायमूर्ति एएम बदर की एकल पीठ के समक्ष संयुक्त रूप से इन याचिकाओं का जिक्र किया।
 सीबीआई के वकील संदेश पाटिल ने बताया कि इस पर न्यायमूर्ति बदर ने कहा कि इन पुनरीक्षण याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई के लिए अगली तारीख चार जुलाई निर्धारित की।
 गौरतलब है कि फरवरी में न्यायमूर्ति रेवती मोहीते देरे की एकल पीठ पुनरीक्षण याचिकाओं की सुनवाई रोजाना आधार पर कर रही थी।  रूबाबुद्दीन ने इस मामले में आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा , दिनेश एमएन और राजकुमार पांडियन को आरोपमुक्त किए जाने को चुनौती दी है।  वहीं , सीबीआई ने गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी एनके अमीन और राजस्थान पुलिस के कांस्टेबल दलपत सिंह राठौड़ को आरोपमुक्त किए जाने को चुनौती दी है।  सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी का दिसंबर 2005 में गुजरात और राजस्थान पुलिस की एक टीम ने कथित तौर पर अपहरण कर लिया था और उनकी हत्या कर दी थी।  एक साल बाद उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की कथित तौर पर राजस्थान पुलिस के कुछ अधिकारियों ने हत्या कर दी।
 सीबीआई की जांच में दोनों घटनाओं को फर्जी मुठभेड़ बताया गया और इसमे 38 लोगों को आरोपी बनाया गया।  इसके बाद शहर की एक विशेष सीबीआई अदालत ने इन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित 14 लोगों को मामले में आरोपमुक्त कर दिया था।

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