Sunday , November 18 2018

मिसालः धर्म से है हिन्दू लेकिन मंदिर के अहाते से इस्लाम की धार्मिक शिक्षा

नई दिल्ली – बीते कुछ सालों से धार्मिक कट्टरता में तेजी से इजाफा हुआ है। लेकिन भारत में अभी भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो धार्मिक सद्भाव की मिसाल करते रहे  हैं. ये वो लोग हैं जिनकी वजह से भारत देश इतना प्यारा बना हुआ है. यहां पर अभी भी ऐसे लोग हैं जो हर एक धर्म का सम्मान करते हैं. अब जो खबर हम आपको बताने जा रहे हैं वो आगरा की है. आगरा की पूजा कुशवाहा एक हिन्दू युवती हैं लेकिन वो क़ुरान पढ़ाती हैं. उन्होंने क़ुरान पढ़ी भी हैं और अब वो 35 बच्चों को क़ुरान  पढ़ाती हैं.

अब इसमें एक और बड़ी प्यारी बात है जो सुन कर आपका दिल ख़ुश हो जाएगा. जहां लोग हिन्दू और मुस्लिम के मामलों पर कट्टरवादी हो जाते हैं. मंदिर और मस्जिद का विवाद बना रहता है वहीं पूजा इन बच्चों को मंदिर के आंगन में क़ुरान की आयतें पढ़ाती हैं.

कौन है पूजा

18 साल की पूजा अभी 12 वीं की छात्रा हैं. उन्हीं की बहन नंदिनी बच्चों को दूसरे विषय पढ़ाती हैं. पूजा ने इस बारे में एक अंग्रेजी समाचार अखबार को बताया कि,”बहुत साल पहले मिली जुली सभ्यता में यकीन रखने वाली संगीता बेगम यहां रहा करती थीं, उनके पिता मुस्लिम और माता हिन्दू थीं, संगीता बच्चों को क़ुरान पढ़ाया करती थीं. मैंने भी उसमें दिलचस्पी ली और उनके पास पढने जाने लगी.”

पूजा ने इस बारे में आगे बताया कि कुछ निजी मसलों की वजह से उन्हें क्लास छोडनी पड़ी, उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं ये क्लास चलाती रहूं. पूजा ने कहा,”संगीता बेगम ने मुझे इस्लाम के एक अहम सिद्धांत से रूबरू कराया कि तुम्हारे शिक्षा हासिल करने का फायदा तभी है जब तुम इसे बांटों”. सहिष्णुता की मिसाल लोगों ने पूजा से कहा कि कि वो बच्चों को मंद्दिर के आंगन में पढ़ा सकती हैं क्योंकि उनका घर छोटा है और उसमें बच्चे पढ़ नहीं सकेंगे.

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