Tuesday , December 18 2018

क्या देश में RSS को मज़बूत करने में कांग्रेस का पूरा योगदान रहा ?

तौसीफ़ क़ुरैशी ।

पाँच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में ही आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव का जाल बिछाया जा रहा है हर उस क़दम और चाल पर ध्यान दिया जा रहा है जिससे उसकी भविष्य की रणनीति भी तैयार समझी जाए या हो जाएँ RSS की सरकारी दफ़्तरों में लगने वाली शाखाओं को लेकर कांग्रेस के घोषणा पत्र में किया गया वादा कि हमारी सरकार आने पर RSS की शाखाओ को सरकारी दफ़्तरों या सरकारी कर्मचारियों के उसमें शामिल होने पर प्रतिबंधित करेगी ? अब सवाल उठता है कि क्या RSS को मज़बूत करने में कांग्रेस का योगदान नही है अब जब वह संगठन इतना शक्तिशाली हो गया कि अब वही तय कर रहा है कि किस पार्टी की रणनीति क्या होगी और उसको सरकार में आना चाहिए या नही कांग्रेस को अब आकर पता चला कि RSS की शाखाओं को सरकारी जगह व उसमें सरकारी कर्मचारियों के शामिल होने पर प्रतिबंधित करना चाहिए जब यह संगठन इस तरह के काम कर अपनी पकड़ को मज़बूत कर रहा था तो देश में अधिकांश समय कांग्रेस की सरकारें रही जब तो उन्हें इस काम की छूट दी गई या तो तब आप ग़लत थे या अब आप ग़लत है जहाँ तक ग़लत और सही की बात है तो मुझे आज के हालात देखने के बाद यह कहने में ज़रा भी झिझक नही है कि 1989 से पूर्व की कांग्रेस सरकारों की RSS को पालने पोसने की रणनीति ग़लत थी बक़ौल राहुल गांधी के कि RSS ब्रदरहुड जैसा है जो एक आतंकी संगठन है अब आप ही तय करे कि क्या सही है और क्या ग़लत ? ।

शिव शिशु मन्दिर स्कूलों को भी शिक्षा के नाम पर नफ़रत फैलाने का अड्डा कहा जाता है कि वहाँ भी बच्चों के ज़हन में नफ़रत का ज़हर भरा जा रहा है इस पर भी मेरा कांग्रेस से सवाल है कि जब शिव शिशु मन्दिरों की स्थापनाएँ करने की तैयारी हो रही थी और उनको मान्यता दी जा रही थी तब कांग्रेस की ही सरकारें थी क्या तब की कांग्रेस या नेता देश में आज जैसे हालात देखना चाहते थे ? या आज की कांग्रेस का RSS विरोध एक दिखावा है ? एक और सवाल लोगों के दिमाग़ में घूम रहा है कि बल्भभाई पटेल को दो अलग-अलग विचारधारा अपनी विचारधारा के क़रीब समझते है या यूँ कहे कि मानते है अब यह बात बिलकुल गले से नीचे नही उतरती की दो विपरीत विचारधारा के मानने वालों का एक ही व्यक्ति आईडियोलोजी कैसे हो सकते है ? इसका भी जवाब तलाशना होगा कि पटेल की हिन्दुत्व वाली नीति थी और उससे कांग्रेस सहमत थी और अगर नही थी तो RSS व उससे जुड़े लोग पटेल को अपना आर्दश क्यों मानते है ? इससे तो यही लगता है कि कही न कही कोई बहुत बड़ी साज़िश है जो किसी न किसी के ख़िलाफ़ है यही सच है।कांग्रेस हो या RSS देश की जनता को मूर्ख बना रही है यह दोनों अन्दर से एक ही है यही बात निकलकर आती जब इतिहास के पन्ने पलटते है तो लगता है कि दोनों दिखाते अपने आपको अलग-अलग है इसी को करने में उनका राजनीतिक फ़ायदा है ऐसा ही लगता है नही तो जब किसी को हम अपनी विचारधारा या देश के लिए ख़तरा मानते है तो उसको इतना बड़ा संगठन बनने क्यों दिया और आप ख़ामोशी से देखते रहे ? क्या यह आपकी आईडियोलोजी पर सवालियां निशान नही लगाता है ?

जहाँ तक देश की जनता की बात है यहाँ ज़हरीली सोच को पसंद नही किया जाता है ज्यातर लोग देश में मौजूद लोगों को साथ लेकर चलने वाली सोच को सही मानते है (यही वजह है कि RSS या उसकी राजनीतिक विंग भारतीय जनता पार्टी से अब मोदी की भाजपा बन गई है को बीस प्रतिशत वोट ही पसंद करते है जो सत्ता की दहलीज़ पर नही ले जा सकते है आज जो मोदी की सरकार सत्ता में है उसको 31% वोट मिले वह RSS की छलकपट वाली रणनीति का हिस्सा है जो अंग्रेज़ों की भी हुआ करती थी 10-11 % वोट गुजरात मॉडल पर बटोरा जो अपने आपको ठगासा महसूस कर रहा है और साम्प्रदायिकता को पसंद करने वाला वोट भी ठगासा महसूस कर रहा है उसी को भ्रमित करने के लिए राम मन्दिर पर क़ानून बनाने की बात की जा रही है), लेकिन शातिर दिमाग़ कांग्रेस ने सबको साथ लेकर चलने वाली रणनीति बनाई जिससे उसे सबसे ज़्यादा लाभ हुआ अगर किसी ने देश पर एक छत्रराज किया वह कांग्रेस है लेकिन वह अजगर , नाग , साँप व बिछू भी पालती रही जब जिसकी ज़रूरत पड़ती उसी का इस्तेमाल करती रही और देश पर राज करती रही लेकिन उन्हीं ज़हरीले जानवरों में से एक ने अब उसी को डँसना शुरू किया तो अब उसमें बहुत सी बुराइयाँ पैदा हो गई है कोई भी ग़लत कार्य ग़लत ही होता है अपने फ़ायदे के लिए उसे सही नही कहना चाहिए वह एक दिन आपके लिए ही मुसीबत बनकर खड़ा हो जाएगा तब उससे लड़ना आसान नही होगा जैसा आज हमें दिख रहा है मुसलमानों को डराकर रखने के लिए कांग्रेस ने ऐसा किया अब भुगत भी खुद ही रही है।

पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि कांग्रेस के सहयोग के बिना RSS इतना मज़बूत नहीं हो सकता था सरकार के सहयोग के बिना इतना ख़तरनाक एजेंडा नहीं चला सकते है लेकिन यह सब होने दिया इससे यह साबित होता है कि सरकारों व कांग्रेस ने ही इसे पाला है, इसके अलावा भी ऐसी कई क्षेत्रीय पार्टियाँ है जिनका मखोटा तो सेक्यूलर है लेकिन अन्दर से RSS के एजेंडे को लागू करते है। क्षेत्रीय दल में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के संस्थापक लालू प्रसाद यादव एक ऐसे नेता है जिनके बारे में कहा जा सकता है कि उन्होंने कभी साम्प्रदायिकता से समझौता नही किया और न ही उन्होंने कभी RSS के एजेंडे को लागू करने की कोशिश की ऐसा मैं नही इतिहास बताता है नही तो मुलायम सिंह यादव हो या कोई और सबने RSS को मज़बूत करने का काम किया है मुलायम सिंह यादव कंपनी की सरकार में षड्यंत्र के तहत 2013 में हुए साम्प्रदायिक दंगें RSS की रणनीति का हिस्सा थे जिसे मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव ने अमलीजामा पहनाया था उसके बाद क्या हुआ था यह हम सब जानते है।यही कहा जा सकता है कि RSS की मज़बूती के लिए कांग्रेस सहित सभी ने सहयोग किया है जिसकी वजह से आज देश के राजनीतिक हालात उन्हीं दलों के विपरीत हो चले है।

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