Tuesday , December 18 2018

SHAYARI

कलीम आजिज़ की ग़ज़ल: दामन पे कोई छींट…

मेरे ही लहू पर गुज़र-औक़ात करो हो मुझ से ही अमीरों की तरह बात करो हो दिन एक सितम एक सितम रात करो हो वो दोस्त हो दुश्मन को भी तुम मात करो हो हम ख़ाक-नशीं तुम सुख़न-आरा-ए-सर-ए-बाम पास आ के मिलो दूर से क्या बात करो हो हम को …

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कराची लाहौर औ कश्मीर : अजमल सुल्तानपुरी

मुसलमाँ और हिन्दू की जान कहाँ है मेरा हिन्दुस्तान मैं उस को ढूँढ रहा हूँ मेरे बचपन का हिन्दुस्तान न बंगलादेश न पाकिस्तान मेरी आशा मेरा अरमान वो पूरा पूरा हिन्दुस्तान मैं उस को ढूँढ रहा हूँ वो मेरा बचपन वो स्कूल वो कच्ची सड़कें उड़ती धूल लहकते बाग़ महकते …

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कराची लाहौर औ कश्मीर : अजमल सुल्तानपुरी

मुसलमाँ और हिन्दू की जान कहाँ है मेरा हिन्दुस्तान मैं उस को ढूँढ रहा हूँ मेरे बचपन का हिन्दुस्तान न बंगलादेश न पाकिस्तान मेरी आशा मेरा अरमान वो पूरा पूरा हिन्दुस्तान मैं उस को ढूँढ रहा हूँ वो मेरा बचपन वो स्कूल वो कच्ची सड़कें उड़ती धूल लहकते बाग़ महकते …

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ग़ज़ल संग्रह ’शाम-ए-ज़िन्दगी’ का विमोचन

शाहजहांपुर, । वरिष्ठ उर्दू शायरा श्रीमती ताहिरा राज़ के ग़ज़ल संग्रह ’शाम-ए-ज़िन्दगी’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर मुशायरा भी हुआ। शहर के मोहल्ला हयातपुरा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इंट्रीग्रल यूनीवर्सिटी कैम्पस के प्रमुख डा. एम वसी बेग बिलाल व कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ शायर खालिद अलवी ने …

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