Saturday , June 23 2018

SHAYARI

ग़ज़ल संग्रह ’शाम-ए-ज़िन्दगी’ का विमोचन

शाहजहांपुर, । वरिष्ठ उर्दू शायरा श्रीमती ताहिरा राज़ के ग़ज़ल संग्रह ’शाम-ए-ज़िन्दगी’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर मुशायरा भी हुआ। शहर के मोहल्ला हयातपुरा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इंट्रीग्रल यूनीवर्सिटी कैम्पस के प्रमुख डा. एम वसी बेग बिलाल व कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ शायर खालिद अलवी ने …

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Shayar डॉ॰ बशीर बद्र (सैयद मोहम्मद बशीर)

डॉ॰ बशीर बद्र (जन्म १५ फ़रवरी १९३६) को उर्दू का वह शायर माना जाता है जिसने कामयाबी की बुलन्दियों को फतेह कर बहुत लम्बी दूरी तक लोगों की दिलों की धड़कनों को अपनी शायरी में उतारा है। साहित्य और नाटक आकेदमी में किए गये योगदानो के लिए उन्हें १९९९ में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। इनका पूरा नाम …

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Meri Maa – Meri Jannat

मेरी ख़्वाहिश है कि फिर से मैं फ़रिश्ता हो जाऊँ माँ से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊँ कम-से कम बच्चों के होठों की हंसी की ख़ातिर ऎसी मिट्टी में मिलाना कि खिलौना हो जाऊँ सोचता हूँ तो छलक उठती हैं मेरी आँखें तेरे बारे में न सॊचूं …

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इन्साफ की डगर पर, नेता नही चलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।

इन्साफ की डगर पर, नेता नही चलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे। दिल में घुसा हुआ है, दल-दल दलों का जमघट। संसद में फिल्म जैसा, होता है खूब झंझट। फिर रात-रात भर में, आपस में गुल खिलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा उस ओर जा मिलेंगे। गुस्सा व प्यार इनका, …

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अब से पहले के जो क़ातिल थे बहुत अच्छे थे, कत्ल से पहले वो पानी तो पिला देते थे: राहत इन्दौरी 

अपने होने का हम इस तरह पता देते थे खाक मुट्ठी में उठाते थे, उड़ा देते थे बेसमर जान के हम काट चुके हैं जिनको याद आते हैं के बेचारे हवा देते थे उसकी महफ़िल में वही सच था वो जो कुछ भी कहे हम भी गूंगों की तरह हाथ …

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