Tuesday , May 26 2020

बीवी का ये काम शौहर को बर्बाद कर देता है….

हज़रत अली रज़ि अल्लाहु अन्हु फरमाते है कि अगर कोई औरत अपने शौहर की बगावत पर उतर आए तो ये समझ जाना चाहिए कि वह शख्श बर्बाद हो जाएगा। इसलिए हम लोगों को चहिये की इस बात का खास ख़याल रखे कि औरत गुनाहों से दूर रहे है, उसे समझते रहे, ताकि शख्श बूरे अमल से बच सकें। और इसी तरह औरत को भी चहिये की वह भी अपने शौहर से बूरी चीज़ो की तरफ़ जाने से रोकती रहे। मियां और बीवी जब एक दूसरे को समझाए तो अ खलाक़ ख़ास ख़्याल रखें। औरत को चाहिए कि वह अपने शौहर को खुश रखे, दोनों मियां बीवी मिलजुल कर रहे।

औरत को अपने शौहर के साथ अच्छे से सुलूक करना, उसका जायज़ बातों मानना, उसका कहना मानना और शौहर को खुश रखना इ’स्लाम में इ’बादत के बराबर बताया गया है। यदि औरत ने कोई गुनाह किया और उससे शौहर नाराज़ रहा, या नाखुश रहा तो ये बड़ा गुनाह है । नबी ए करीम मोहम्मद मुस्तुफा सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि “औरत पाँच वक़्त की नमाज़ पढ़ती रहे, रमज़ान पाक के महीनों के रोज़े भी रखती रहे और वह औरत इसके साथ अपनी इज्जत बचाती रहे और वह पाक दामन रहे।

औरत अपने शौहर का कहना मानती रहे यानी फ रमाबर दारी करती रहे और ताबेदारी करती रहे तो इस औरत को इख्तियार है कि वो जिस दरवाजे से चाहे जन्नत में चली जाए”। जब मियां अपनी बीवी को अपनी हाज़त पूरी करने के लिए बुलाए तो बीवी को चहिये की वो सब काम छोड़ कर अपने शौहर के पास चली जाए। इसी प्रकार अगर किसी की बीवी उसके शौहर की फरमाबरदारी नही करे, उस का कहना नही माने, उससे अच्छे से सुलूक नही करे तो क़ुरआन ए करीम ने इस कि इस्लाह पर 3 तरतीब वॉर तीन तरीके बताए है ।

शौहर को बीवी को तलाक देने से पहले ये 3 बातों पर अमल जरूर करना चाहिए। सबसे पहला तरीका तो यही है कि शौहर अपनी बीवी को अच्छे से समझाए ।उसकी ग़लत फ़हमी दूर करे। उसकी पूरी बातों को तवज्जो से सुने । अगर वाकई औरत ये सब चीजें जानकर कर रही है तो शौहर को चाहिए कि वो उसे समझाए और बीवी को सही रास्ता इख़्तियार करने को कहे। दूसरा तरीका यह है कि शौहर को अपनी बीवी से नाराज़गी दूर करने के लिए बिस्तर अलग कर ले, उससे कुछ दिन अलग रह ले ।

ये एक बेहतरीन तरीका भी है और सज़ा भी है । इससे बीवी मुतंब्बा हो जाए तो झ’गड़ा यही ख़त्म हो जायेगा। औऱ यदि इसके बाद भी बीवी शौहर की नाफरमानी करे और कज रवी से बाज़ आए तो तीसरे दर्जे मस शौहर को औरत को हल्की से मार मारने की भी इजाज़त है । लेकिन मार इस हद्द तक हो कि इस मा’र का असर न हो और जख्म भी न हो ।इस तीसरे दर्जे की सजा को नबी ए करीम सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने स’ही नही फरमाया है । इस दर्जे से बचना चाहिए ।

बहर हाल मामूली मा’र से भी अगर मामला दुरुस्त हो जाए, औरत समझ जाए, और मकसद हासिल हो तो शौहर को चहिये की वो भी बा’ल की खाल नही निकाले। शौहर को हर बात मनवाने की जिद्द नही करना चाहिए। शौहर को चश्म पोशी और दरगुज़र से काम लेना चाहिए ।और इमकान निभाने की भी कोशिश करना चाहिए। अगर इसके बाद भी औरत नही सुधरे तो तलाक दे देना चाहिए ।

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