Saturday , September 26 2020

हर समस्या का हल, अपनी समस्या का ठीकरा किसी मुस्लिम पर फोड़ना

प्रतीकात्मक फोटो

नए भारत के पास बहुत सारी समस्याओं का एक रामबाण इलाज है. अगर आप किसी मुसीबत में फंस जाएं जो आपको सिर्फ एक काम करना है- अपनी समस्या का ठीकरा किसी मुस्लिम पर फोड़ना है. ऐसा करके ना सिर्फ अपनी समस्या का समाधान खोज पाएंगे बल्कि सोशल मीडिया पर ‘हिंदू सिपाहियों’ की फौज भी आपके लिए आगे आएगी, पुलिस तहकीकात में जुट जाएगी और सरकार तुरंत कार्रवाई करेगी.

क्या आप भी केरल के पलक्कड़ जिले में एक गर्भवती हथिनी की पटाखे से भरा अनानास खाने से हुई दर्दनाक मौत से आहत हुए थे ? आप चाहते थे कि इस घटना पर हर कोई आक्रोश दिखाए? लेकिन जिस तरह कराची विमान क्रैश में मारे गए सैंकड़ों पाकिस्तानियों की मौत पर जश्न मनाया गया था. वैसा हथिनी की मौत पर नहीं हुआ था आपको पसंद नहीं आया?

खैर, भारत इस मामले में थोड़ा खुशकिस्मत है. मीडिया ने अपनी भूमिका हथिनी की लोकेशन पलक्कड़ से मलप्पुरम (मुस्लिम बाहुल्य) में बदलकर निभाई. सबसे ज्यादा जरूरत इस खबर को भुनाने में थी और ये अफवाह फैलाने की कि ये कृत्य किसी ‘मुस्लिम’ द्वारा किया गया है. इसने जानी मानी एनिमल एक्टिविस्ट और पूर्व मंत्री मेनका गांधी को आगे आने के लिए प्रेरित किया और इसके बाद सांप्रदायिक रंग देने के लिए मुस्लिम बाहुल्य मलप्पुरम का नया एंगल जोड़कर अफवाहों का एक अंतहीन लाइन लगा दी गई.

जल्द ही भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर पार्टी के अन्य नेताओं, ‘राष्ट्रवादी’ अक्षय कुमार और क्रिकेटर विराट कोहली ने सोशल मीडिया हैंडल्स पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं. इनमें से ज्यादातर लोग लॉकडाउन की वजह से दो महीने से सैंकड़ों मजूदरों और गरीब भारतीयों की मौतों पर चुप रहे, क्योंकि मोदी सरकार लॉकडाउन की घोषणा के बाद इन गरीबों के लिए कोई विशेष प्रंबंध नहीं कर सकी. ‘इस कृत्य के लिए एक मुस्लिम जिम्मेदार है’ खबर को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए सरकार समर्थक पत्रकार दीपक चौरसिया ने ये ट्वीट किया कि इस घटना के लिए दो मुसलमानों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है. लेकिन क्या इस तथ्य से फर्क पड़ता है कि इस केस में पुलिस ने अभी तक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है और वो मुसलमान नहीं है.

एक कारगार रणनीति

मुस्लिम एंगल ये बात तो सुनिश्चित कर देता है कि मूक बने रहने वाले मंत्री रातोंरात सामाजिक कार्यकर्ता बन जाएं और वादा करने लगें कि मोदी सरकार हथिनी की हत्या के मामले की जांच कराने में दिन रात एक कर देगी. इसके साथ ही बहुसंख्यकों को एक नया मुद्दा मिल जाता है ताकि कट्टरता की खुराक में कोई कमी ना आने पाए.

ये आक्रोश ना केवल सांप्रदायिक है, बल्कि चयनित भी है. लॉकडाउन के दौरान लाखों मजदूर हजारों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर अपने गांव पहुंच रहे थे. लेकिन एक भी नेता या अधिकारी को उनकी पीड़ा के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया.

जब जनवरी में कोरोना महामारी फैलनी शुरू हुई थी. दूसरे देशों ने इससे निपटने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए थे, लेकिन भारत फरवरी के आखिरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्वागत में लगा हुआ था. अगले महीने, 11 मार्च को भाजपा पार्टी के हेडक्वार्टर्स पर कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के आगमन का स्वागत किया जा रहा था. उसके बाद मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार को गिराने में व्यस्तता दिखाई दी और फिर आखिरकार मोदी सरकार ताली-थाली के बाद 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा की जिसके लिए लोग कोरोना फैलने की सारी चिंताएं छोड़कर घरों से बाहर आए.

और फिर आई दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज की खबर जो मार्च 13-15 को आयोजित की गई थी. रिपोर्ट्स में बताया गया कि यहां आए कुछ लोग कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए हैं. इसके बाद पूरे देश कोरोना महामारी के खतरे का आभास हुआ, साथ सोशल डिस्टैंसिंग के बारे में पता चला और ये बात भी पुख्ता हुई कि धार्मिक सभाओं में मास्क पहनना कितना अनिवार्य है. पुलिस को रिपोर्ट करने की बात की महत्ता भी पता चली. उसके बाद से तबलीगी जमात पर आरोपों की झड़ी रुकी ही नहीं है. भाजपा शाषित राज्यों जैसे कभी उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री तो कभी गुजरात के मुख्यमंत्री देश में कोरोना फैलने के जिम्मेदार तबलीगी जमात को ठहराते हुए नजर आते हैं. ये कम नहीं था मोदी सरकार ने 2600 तबलीगी जमात के लोगों को आने वाले दस साल तक ब्लैकलिस्टेड कर दिया.

कैसे पुलिस से कार्रवाई कराएं?

मुस्लिमों को दोष देने वाला ये नया समाधान पुलिसिंग सिस्टम के लिए भी एक प्रभावी टूल बन रहा है. अगर किसी संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस महीनों और सालों के कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, तो दोष किसी मुस्लिम पर लगाकर देखेंगे तो पाएंगे कि पूरा प्रशासन उस गुत्थी को सुलझाने में लग जाएगा. बिहार के गोपालगंज जिले में एक बच्चे के नदी में डूबकर मरने के केस में पुलिस जांच में मौत का कारण स्पष्ट नहीं था. ऐसे में फेक खबरें फैलाने वाली एक ऑपइंडिया नाम की एक वेबसाइट ने झूठी स्टोरी छापी कि बच्चे को किसी मस्जिद में बली चढ़ाने के लिए मारा गया है. इसके बाद पुलिस इस केस को सुलझाने में जुट गई. कुछ दिन के भीतर ही बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय घटनास्थल पर गए और नदी में भी उतरे. बाद में साफ किया गया कि बच्चे की मौत डूबने से हुई है और इसमें कोई मुस्लिम एंगल नहीं है.

अगर किसी अंतर धार्मिक जोड़े के रिश्ते में कोई परेशानी आ जाए, तो मुस्लिम आदमी को घेरें और उनके रिश्ते को ‘लव जिहाद’ क नाम दें. हिंदू समाज महिला को न्याय दिलाने के लिए जमीं-आसमान एक कर देगा. अगर आपका स्थानीय मंदिर सालों से टूटा हुआ है और मरम्मत की जरूरत है तो आप व्हॉटसऐप यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदान की गई शक्तियों का उपयोग करते हुए ये अफवाह भी फैला सकते हैं कि मुस्लिम मंदिर में बिच्छू डाल रहे हैं. और उसके बाद हिंदू समाज एक साथ उठेगा ये बात सुनिश्चित करेगा की आपकी जिंदगी पर कोई आंच ना आए और आप उस मंदिर में पूजा-पाठ कर सकें.

भारत जैसे हमारे एक बडे़ देश में, सरकार ने नागरिकों को खुद की देखभाल के उनके हाल पर ही छोड़ दिया कि – आत्मनिर्भर बनो. ऐसे केस में हमारी समस्याओं का आसान हल है- एक मुस्लिम को दोष देना.

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