Saturday , September 26 2020

SHAYARI

Famous Shayari of Allama Iqbal (अलामा इक़बाल की प्रसिद्ध शायरी)

Allama Iqbal   सारे जहां से अच्छा… के लेखक मोहम्मद इकबाल को अलामा (विद्वान) इकबाल के नाम से भी जाना जाता है। कुछ समीक्षक इन्हें गालिब के बाद उर्दू का सबसे बड़ा शायर मानते हैं। पेश हैं उनके कुछ शेर… *****   सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा हम बुलबुलें …

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बेगम अख्तर.. शकील बदायूं और अच्छे दिनों को श्रद्धांजलि :-

ऐ हुकूमत तेरे जुमलात पर रोना आया, देश के उजड़े व्यापार पर रोना आया। कुछ तो छिनते हुए रोजगार ने दिल तोड़ दिया, और कुछ तल्खी-ए-हालात ने दिल तोड़ दिया। हमने तो तुमको जिताया था उम्मीदों से बहुत, देखकर श्रीराम को तिरपाल में रोना आया। स्वामी नवेदानंद”लंकेश” 9918223245 [email protected]

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ताहिर फ़राज़

  इतना भी करम उनका कोई कम तो नहीं है, ग़म दे वो  पूछें हैं, कोई ग़म तो नहीं है। नक्शा जो मुझे ख़ुल्द में दिखलाया गया था, ए साहिबे-आलम, ये वो आलम तो नहीं है। [(ख़ुल्द = स्वर्ग, बहिश्त), (आलम = दुनिया, संसार, अवस्था, दशा)] हालात मेरे इन दिनों …

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Rahat Indauri Shayari

राहत इन्दौरी  सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे चले चलो की जहाँ तक ये आसमान  रहे ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल मज़ा तो तब है के पैरों में कुछ थकान रहे वो शख्स …

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Waseem Barelwi Shayari

शहर मेरा उदास गंगा सा कोई भी आए और अपने पाप खो के जाता है धोके जाता है आग का खेल खेलने वाले ये नहीं जानते कि पानी का आग से बैर है हमेशा का आग कितनी ही ख़ौफ़नाक सही उस की लपटों की उम्र थोड़ी है और गंगा के …

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Allama Iqbal, Ghazal

Iqbal – “Shikwa” shikwa-kyon zian-kar banoon Iqbal’s poem “Shikwa” was one of his most thrilling poems, which he recited personally in the month of April 1911 at the annual session of Anjuman Himayat-e-Islam held in the compound of Islamia College, Lahore. It was largely applauded and subsequently published in the …

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Ahmad Faraz, Ghazal

Faraz – Dost Ban Kar Bhi Nahin Sath Nibhane Wala Dost Ban Kar Bhi Nahin Sath Nibhane Wala, Wohi Andaz Hai Zalim Ka Zamane Wala, Ab Ise Log Samajhate Hain Giraftar Mera, Sakht Naadim Hai Mujhe Daam Mein Lane Wala, Kya Kahen Kitne Marasim The Hamare Is Se, Wo Jo …

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Munawwar Rana Ghazal

Kabhi Khushi Se Khushi Ki Taraf Nahi Dekha   कभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ़ नहीं देखा तुम्हारे बाद किसी की तरफ़ नहीं देखा ये सोच कर कि तेरा इंतज़ार लाज़िम*है तमाम उम्र घड़ी की तरफ़ नहीं देखा यहाँ तो जो भी है आबे–रवाँ* का आशिक़ है किसी ने ख़ुश्क …

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