Saturday , May 21 2022

COLUMNS

आज़म खान को लेकर अखिलेश ने बाँहें घड़ियाली आँसू

चुनाव की आहट दिखाई देने लगी है इसके साथ ही नेताओं के द्वारा घड़ियाली आँसू बहाने की शुरूआत भी हो गई सपा के सीईओ अखिलेश यादव को भी आज़म खान की याद आनी शुरू हो गई है उनका कहना है कि आज़म खान के साथ इतना अन्याय हो रहा है …

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सेक्युलर और साम्प्रदायिक दल है ओवैसी के उदय का कारण ?

बिहार चुनाव के परिणाम सेकुलरिज्म की ताल ठोंकने वाले दलों के साथ-साथ विषैली सियासत के खेवनहारों के लिए भी बहुत कुछ सबक़ दे गया है सबसे बड़ा संदेश सेकुलरिज्म के अलमबरदारों के लिए बहुत कुछ विचारणीय है जिनको हिन्दुत्व से भी लगाव है और सेकुलरिज्म का लबाधा भी ओढ़े घूमते …

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जमीअत उलमा-ए-हिंद के प्रयासों से 6 और लोगों की जमानत मंजूर

जिला प्रशासन को जवाबदेह बनाए बगैर देश में दंगों पर क़ाबू पाना मुम्किन नहीं : मदनी ज़मानत पर रिहाई ही एकमात्र लक्ष्य नहीं, हम सभी निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं नई दिल्ली (तौसीफ़ क़ुरैशी) । जमीअत उलमा-ए-हिंद के प्रयासों से दिल्ली दंगों में कथित …

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तेजस्वी की सभाओं में आ रही भीड़ आकर्षण का केन्द्र, नीतीश की पेशानी पसीने पसीन

पटना। लोकतंत्र में चुनाव भी ऐसा मेला या उत्सव होता है कि इस मेले या उत्सव में शामिल क्या नेता क्या अभिनेता जनता जनार्दन के दरबार हाज़िरी लगाने को बेताब रहता और जनता भी ख़ूब आनन्द लेती है लेकिन अगर जनता भावनाओं में बहकर वोट करती है तो फिर रोती …

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दशहरे पर इस्लामिक विद्वानों से होगा मिलन

संघ प्रमुख भागवत जा सकते है देवबन्द संघ देश में बहुसंख्यक के दिलोदिमाग़ में मुसलमानों के प्रति लगभग सौ साल से ज़हरीली एवं नफ़रतों के बीज बोता आ रहा है। अब ज़हरीली खेती की फसल पूरे उफ़ान पर है लेकिन वही संघ अब उसके परिणामों से भयभीत लगता है या …

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हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं, लेकिन नकारात्मक रिपोर्टिंग संविधान के विरुद्ध

जब फ्रीडम ही पूर्ण (Absolute) नहीं है तो फ्रीडम ऑफ स्पीच पूर्ण (Absolute) कैसे हो सकती है। फ्रीडम ऑफ स्पीच का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप किसी पर अनाप-शनाप टिप्पणी करें। किसी की निष्ठा पर प्रहार करें। शायद इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने तबलीगी जमात के लोगों …

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क्या बलात्कार को रोकने का हल इस्लामी तालिमात में मौजूद है ?

बलात्कार एक ऐसी प्रताड़ना है जो नारी कि आत्मा पर अभिशाप का काँटा बन कर चुभ जाता है। जो समाचार पत्रिका, चैनल, रेडियो आदि पर कुछ समय बीत जाने पर अतीत बन जाता है परंतु उस नारी के लिए जिसके साथ बलात्कार जैसी घिनौनी घटना घटी है अतीत नहीं बनता। …

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हिन्दू-मुसलमान दोनों की आँख के तारे क़ाज़ी रशीद मसूद नही रहे

चालीस साल तक सहारनपुर की सियासत में अपना दबदबा रखने वाले साथ ही प्रदेश और देश की सियासत में भी जगह बनाने वाले छह बार लोकसभा और दो मर्तबा राज्यसभा के सदस्य और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री रहे दिग्गज नेता क़ाज़ी रशीद मसूद इस दुनियाँ ए फ़ानी को अलविदा कह …

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यूपी की क़ानून-व्यवस्था को भ्रष्टाचार की दीमक ने निगला ?

धर्म और जाति देखकर क़ानून-व्यवस्था को बिगड़ने से नही रोका जा सकता यूपी में क़ानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नही रही। क़ानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर सूबे की सत्ता में आई मोदी की भाजपा के लिए सत्ता में आने के बाद क़ानून-व्यवस्था संभाल पाना मुश्किल हुआ। इन्हीं का नारा …

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राहत इंदौरी : मैं कितनी बार लुटा हूँ हिसाब तो दे…

1 जनवरी 1950 को इंदौर में जन्मे राहत क़ुरैशी इंदौरी ने लगभग 16 वर्षों से अधिक उर्दू साहित्य को इंदौर विश्वविद्यालय में पढ़ाया। उनके 6 से अधिक ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हुए। 50 से अधिक फिल्मी गीत लिखे, म्यूज़िक एल्बम आयीं और फिल्मों में अभिनय भी किया। “तुझे क्या दर्द की …

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