Monday , August 3 2020

कोविड-19 आपदा के समय मुस्लिम समुदाय का सौहार्द

वायरस, नफरत और अलगाव के माहौल में मानवता व् परोपकार

कोविड-19 आपदा के समय मुस्लिम समुदाय का सौहार्द

सारा मलिक, स्वतंत्र पत्रकार – आज पूरा विश्व‌ महामारी की चपेट में है । कोरोनावायरस से जनित कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए लॉकडाउन से पूरा भारत अस्त-व्यस्त है। बहुत बड़ी संख्या में कामगार और मज़दूर वर्ग इसी लॉक डाउन के कारण अपने रोजगार के साधनो से वंचित हो कर पलायन को मज़बूर हुए ! अपर्याप्त राजकिय वयवसथाओं के चलते जिस प्रकार इस वर्ग को कठिनाईयों का सामना करना पड़ा और एक पीड़ादायक स्थिति से गुजरना पड़ा उस समय में विभिन्न शहरों में कई संस्थाओं और समाज के अग्रणी नागरिकों द्वारा बिना किसी धार्मिक जातिगत भेदभाव के सहयोग के मानवीय पहलु देखने को मिले ! संक्रमण की संख्या जिस रफ्तार से देश में बढ़ रही है यह अत्यंत ही गंभीर स्तिथि है। अब संक्रमण के खतरे से समाज में भय व्याप्त हो रहा है ! यह समय धैर्य रखने का है, सावधानी बरतने का है ! संयम और सामंजस्य की आवश्यकता अत्यधिक है। यह समय मानवता आत्मसात करने, मानवीय मूल्यों की महत्ता का आकलन, हमारे समाज और हमारी स्थिति पर गंभीरता से विचार करने का समय है ! यह चिंतन और मनन किया जाना चाहिए कि हमने किस तरह से समाज का निर्माण किया है जिसमें हम और हमारी आने वाली पीढ़ी कहां तक सुरक्षित है। यह अवलोकन करने का समय है । भारत आज जो है उसकी रचना में भारतीय जनता के प्रत्येक वर्ग का योगदान है यदि हम इस बुनियादी बात को नहीं समझ पाते हैं तो हम भारत को समझने में असमर्थ रहेंगे।

यह भी पढ़ें : कोरोना युद्ध में शहीद हुए डॉ जावेद अली

ऐसे समय में मीडिया के एक पक्ष द्वारा ‘तबलीगी जमात’ के नाम पर नफरत परोसी गई और फैलाई गई जो निसंदेह, सांप्रदायिक ताकतों की सामंती सोच के द्वारा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को पूरी तरीके से निष्क्रिय बनाने का सबूत है। भारत की आत्मा को एक गंभीर क्षति इस तरह के प्रचार से हुयी है ! भारत की आत्मा को बचाने का संघर्ष लंबा और कठिन होगा। स्थितियाँ बेहतर होने से पहले अगर खराब है, तो उनको ठीक करने का काम किया जा सकता है। “कोविड-19” जिसको ‘कोरोना काल’ की संज्ञा दी गई है, भारत में इसे सांप्रदायिक जामा पहनाए जाने की कोशिश की गयी ! आज इस महामारी में जब पूरा भारत विस्थापन, बेरोजगारी, भूख जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे में देश का मुख्यधारा मीडिया भले ही मुस्लिम समाज को देश विरोधी साबित करने की भरपूर कोशिश कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि जब भी देश पर कोई खतरा आता है तो उससे निपटने के लिये मुस्लिम समाज पूरी तरीके से देश में पूर्ण आस्था रखते हुए बढ़-चढ़कर सहयोग देता है। एक ओर जब मुख्यधारा का मीडिया ताली और थाली बजाने जैसे विचारों को बढ़ावा दे रहा था तब से मुस्लिम समाज के लोग जरूरी चीजें जैसे मास्क सैनिटाइजर और राशन समाज में बिना किसी भेदभाव के बांट रहे हैं। महाराष्‍ट्र की राजधानी और बॉलीवुड सिटी में रहने वाला इब्राहीम मोतीवाला फैमिली एक बार में करीब 800 लोगों के लिए खाना तैयार करवा कर जरूरतमंदों को बांटते रहे हैं ! देश के विभिन्न शहरों से ऐसे बहुत से मुस्लिम नागरिक समूह के योगदान को नाकारा नहीं जा सकता !

यह भी पढ़ें : प्रयोग करते हैं N-95 मास्‍क तो हो जायें सावधान, बड़ी चेतावनी

मुस्लिम समाज ने अनूठा प्रयास किया है ,और लगातार प्रयासरत है‌। दयालुता मानवीय दृष्टिकोण है ! मुस्लिम समाज के साथ-साथ प्रत्येक घर में, समाज में और अन्य समुदाय के अधिकांश ऐसे लोग एक दूसरे का साथ देने के लिए तैयार है ,जो लाखों भारतीयों के लिए एक आशा को जीवित रखता है । यह कार्य कट्टरता और क्रूरता पर करुणा की बहुलता की विजय का प्रतिनिधित्व करता हैं। भारत के मुस्लिम समाज के द्वारा संकट से प्रभावित लोगों की मदद के लिए जो प्रयास किए गए हैं वह समान रूप से प्रशंसनीय है। देश के सभी हिस्सों से मुस्लिम लोगों द्वारा अन्य कोरोना रोगियों की जान बचने के लिए उपचार में अत्यंत उपयोगी प्लाज़्मा दान करने की बहुत उदाहरण सामने आये हैं ! करुणा से नफरत नष्ट हो जाती है । अपने स्वभाव से ही प्यार पैदा होता है, और वह एक सहयोगी समाज, एक खूबसूरत दुनिया बनाता है । कोविड-19 के बाद की दुनिया की कल्पना क्या ऐसी ही सुंदर दुनिया के रूप में हम करना चाहेंगे ?लोग प्रयासरत हैं। इस प्रयास में मुस्लिम समाज का ज़ज़्बा भी बराबर का भागीदारी है।

यह भी पढ़ें : पुलिस इंस्पेक्टर हत्यारा, बना प्रधानमंत्री जन कल्याणकारी अभियान का स्टार प्रचारक

राजनीतिक लाभ के लिए दक्षिणपंथी शातिर एजेंडे पे मुस्लिम समाज विशेष रूप से निशाने पर रहा है ! तबलीगी जमात का कोरोनावायरस को फैलाने में पूरे समुदाय पर आरोप लगाना बहुत ही अपमान जनक है ! इस सब के बावजूद कई मुस्लिम व्यक्तियों व् सामूहिक निकायों और संगठनों ने प्रभावित लोगों के दर्द को कम करने की ज़िम्मेदारी ली । ऐसे समय में जब राजकीय स्वास्थ्य सेवाएं असफल हो रही हैं और निजी अस्पताल कोविड-19 मामलों के लिए अत्यधिक धनराशि लगभग 50000 रूपए प्रतिदिन या आठ लाख रूपए का पैकेज तक वसूल रहे हैं तब कई सारे मुस्लिम डॉक्टर एसोसिएशन साथ मिलकर काम कर रहे हैं जो कि कोविड-19 के मरीज़ों से कोई पैसा नहीं वसूल रहे भले ही कोरोना रोगी उनकी जाति या धर्म के हो या ना हो । ऐसी ही एक पहल गुजरात के बड़ौदा में में जो की सबसे अधिक प्रभावित राज्य के रूप में उभरा है बड़ौदा मुस्लिम डॉक्टर्स एसोसिएशन ने डॉ वसीम मलिक व् डॉ मोहमद हुसैन के सहयोग से की है जिसमे बिना किसी जाती , पंथ या धर्म के भेदभाव के कोरोना के मरीज़ों का इलाज बिलकुल मुफ्त में किया जा रहा है। मरीज़ों से बिना कोई राशि लिए वेंटिलेटर्स, दवाईआं, भोजन व् उपचार प्रदान किया जा रहा है !

यह भी पढ़ें : ऑनलाइन क्लासेज से बच्चों को हो सकती है गंभीर बीमारी

भारत में कोविड-19 की कहानी वंचित से शुरू नहीं होती और नफरत से खत्म नहीं होती ! आज हमारी सामूहिक स्थिति का एक अभिन्न पहलू यह है कि इस त्रासदी ने अद्भुत संकल्प को जन्म दिया है ! सद्भाव व् सम्मान के विस्तृत दृष्टिकोण रखने वाले नागरिकों द्वारा नफरत का मुकाबला प्यार और करुणा से करने का एक प्रयास है जो आने वाली पीढ़ी को सदियों तक प्रेरणा देता रहेगा और इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा । देश की राजधानी में जहाँ तब्लीगी जमात के इजलास पे सवाल उठे थे वहीँ राजधानी के अलग अलग क्षेत्रों में बहुत सी मस्लिम तंजीमो ने आपदा ग्रस्त लोगों की बिना किसी धार्मिक जातिगत भेदभाव के मदद के प्रयास किये ! ‘ अनहद ‘ समाजिक संगठन के समाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी , फिल्म मेकर व् कवि गौहर रज़ा जैसे मुस्लिम सामाज के अग्रणीय नागरिकों ने राशन, भोजन, दवाइयों, वस्त्रों से जरूरतमंदों की विभिन्न क्षेत्रों में सहायता की !

यह भी पढ़ें : कर्फ्यू नियमों को तोड़ने पर मंत्री के बेटे को लगाई लताड़

देशभर में समाज के कमजोर वर्ग को राहत प्रदान करने के लिए अलग अलग नागरिक संस्थाओं ने समाज में मिसाल पेश की है! विशेष रूप से कुछ मुस्लिम सामाजिक संगठन धार्मिक या जातिगत पहचान की परवाह किए बगैर सभी को समान रूप से सहयोग प्रदान करने के लिए काम कर रहे हैं ! लखनऊ में अधिवक्ता वर्ग से ज़फर अज़ीज़ ( एडवोकेट) पुराने लखनऊ में मास्क वितरण, राशन वितरण और जागरूकता फैलाने में सहयोग करते हैं, तो वही नौशाद हुसैन पठानिया (प्रिंसिपल) और एक हिजाब पहने मुस्लिम महिला निखत अबरार मलिक (हिंदी प्रवक्ता ) गरीब बच्चे बच्चियों को और उनके घर वालों को इस बीमारी में बचने के उपाय समझाती हैं और उनके संशय को दूर करती हैं, ताकि वह सभी लोग अपने आप को इस बीमारी से बचा सके। कोविड-19 लाइफ लाइन जिस का संचालन मोहम्मद अहसान, इमरान खान, फरहत खान, रफत जहान, मोहम्मद सैफ़, मोहम्मद नूर और दीपक शर्मा, मोहम्मद यासिर द्वारा किया गया, यह व्यापक सामुदायिक राहत प्रयास है। अब महामारी के दौर में शहर और दूरदराज के नगरों में गरीबों और रेल आश्रितों को 1 दिन में 2500 से अधिक लोगों को भोजन परोसा जा रहा है ! स्वैच्छिक दानदाता और लाभार्थी प्रत्येक धार्मिक समुदाय और हर संप्रदाय से आते हैं। भूखे और वंचित के लिए हमारी मानवता को व्यक्त करने के लिए ये मौलिक अवसर है ।

यह भी पढ़ें : गैरमुस्लिम कर्ज़दार इमाम साहब की बात सुनकर कहा पहले

सद्भाव को लेकर तमाम सारे लोग जो कि मुस्लिम समाज के हैं उनका मुस्लिम के खिलाफ व्यापक पूर्वाग्रह, धार्मिक पहचान या सामाजिक स्थिति की परवाह किए बिना इस संकट में प्रभावित होने वाले सभी वर्ग के लोगों को सेवा करने का प्रयास है । माइल्स टू स्माइल संस्था ने शिव विहार में दिल्ली दंगा प्रभावित इलाकों में मुस्लिम विस्थापितों, महिलाओं की आर्थिक मदद करके उन्हें दुबारा रोजगार उपलब्ध करवा कर एक अनूठा प्रयास किया ! आई आई टी स्कॉलर आसिफ मुज्तबा व् उनके साथ युवाओं ने मस्तफाबाद, लाल बाग़ दंगा प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं को सिलाई मशीन उपलब्ध करवा कर मास्क और पी पी किट्स का उत्पादन स्थानीय स्तर पर करवा कर आत्मनिर्भर बनाने की मुहीम को स्थापित किया!

यह भी पढ़ें : सूरमा भोपाली दुनिया को अलविदा कह गए

हालांकि इस्लामोफोबिया की छाया व् शारीरिक और मानसिक खतरों के बावजूद मुसलमानों ने संकट में लोगों का समर्थन करना जारी रखा है । राहत के कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधनों की गणना करते हुए मुसलमान सामाजिक कार्यकर्ता विभिन्न समूहों के भीतर युवाओं को सशक्त बना रहे हैं ताकि न केवल मौजूदा भूख की स्थिति को पूरी तरह से निवारण कर सकें बल्कि निवारक उपायों को अपनाने के लिए अपने समुदाय को तैयार कर सकें । परोपकार के कार्य में एक जुड़ाव है और साथ ही मानव सेवा करने का अह्वान मुसलमानों ने स्वीकार किया है ! लोगों के भोजन, जीवन और प्रतिष्ठा के अधिकारों की रक्षा के लिए संकल्पित हुए हैं ! उन्होंने सहानुभूति पूर्ण कृतियों से इसको पूरा किया इसके अलावा विस्तारित तालाबंदी और रमजान के महीने में भी राहत कार्यों में लगे रहे हैं ! इन मुस्लिम समुदाय और संगठनों को अपने प्रयासों को बनाए रखने और कई परिवारों और अन्य समुदाय की जरूरत में सहायता करने व महामारी के खिलाफ लड़ाई में फ्रंटलाइनर के रूप में याद किया जाएगा।

Please Subscribe-
Facebook WhatsApp Twitter Youtube

PLEASE ACKNOWLEDGE

The act of charity is very noble and highly admired by Allah (SWT). Just do it for the right people.
Voice of Muslim has been conveying the message of Islam to Muslims and non-Muslims. The aim is to make people aware of the factual news of Islam and the correct Islamic message
وائس آف مسلم مسلمانوں اور غیر مسلموں تک اسلام کا پیغام پہنچاتی رہی ہے۔ اس کا مقصد لوگوں کو اسلام کی حقیقت سے متعلق خبروں اور صحیح اسلامی پیغام سے آگاہ کرنا ہے
The Voice of Muslim independent, investigative journalism takes a lot of time, money and hard work to produce. …We are relying principally on contributions from readers and concerned citizens.
Your valuable contribution can save a life or make a difference to the quality of another human life, indirectly contributing to the social & economic stability of the community at large.
برائے کرم امداد کریں! Support us as per your devotion !
www.voiceofmuslim.in (since 2017)
Voice of Muslim
Account Details-
Acount Name :- VOICE OF MUSLIM
Bank Name :- STATE BANK OF INDIA
A/c No. :- 39107303983
IFSC CODE : – SBIN0005679
PAYTM MOBILE NO. 9005000008
Please share this message in community and be a part of this mission

About Shakeel Ahmad

Voice of Muslim is a new Muslim Media Platform with a unique approach to bring Muslims around the world closer and lighting the way for a better future.
SUPPORT US

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com