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मशहूर विद्वान मौलाना वहीदुद्दीन का कोरोना से निधन

प्रसिद्ध इस्लाममिक स्कॉलर मौलाना वहीदुद्दीन का इंतकाल हो गया है। वे कोरोना संक्रमण से जूझ रहे थे। उन्हें हाल ही में एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तबीयत बिगड़ने के कारण बुधवार रात उन्होंने 96 साल की उम्र में अपनी अंतिम सांस ले ली है। मौलाना वहीदुद्दीन को इसी साल राष्ट्रपति द्वारा देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान यानी पद्म विभूषण से नवाजा गया था।

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मौलाना वहीदुद्दीन को हिन्दू-मुस्लिम सामंजस्य के लिए जाना जाता है। गांधीवादी विचारों के मुस्लिम विद्वान मौलाना वहीदुद्दीन देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के भी करीबी माने जाते हैं। पीएम मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया है।

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जनवरी 1925 में उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के एक गाँव में जन्मे मौलाना वहीदुद्दीन खान को एक बहु-जातीय समाज में इस्लाम, भविष्यवाणियाँ, आध्यात्मिकता और सह-अस्तित्व पर 200 से अधिक पुस्तकों के लेखक होने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने दो खंडों में पवित्र कुरान की एक टिप्पणी भी लिखी। उन्हें दुनिया के 500 सबसे प्रभावशाली मुसलमानों में सूचीबद्ध किया गया है। उन्हें दुनिया भर में उनकी कृति “गॉड अरिजस: एविडेंस ऑफ गॉड इन नेचर एंड साइंस” के लिए जाना जाता है। उन्होंने 1976 में द अल-रिसाला (द मैसेज) उर्दू नामक एक मासिक पत्रिका शुरू की, जिसमें लगभग पूरी तरह से उनके लेखन शामिल थे। पत्रिका का एक अंग्रेजी संस्करण फरवरी 1984 में शुरू हुआ और दिसंबर 1990 में एक हिंदी संस्करण शुरू हुआ। खासतौर पर उनकी चर्चा ‘इस्लाम में महिलाओं के अधिकार’, ‘कांसेप्ट ऑफ जिहाद’, ‘विमान अपहरण-एक अपराध’ जैसे लेखों के लिए की जाती है।

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वे गांधीवादी मूल्यों और शांतिप्रियता के लिए जाने जाते हैं, पूरी दुनिया में उन्होंने इस्लामिक विद्वान के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने ही कुरान का बेहद आसान अंग्रेजी भाषा में अनुवाद किया था, वहीदुद्दीन ने कुरान पर एक टिप्पणी भी लिखी है।

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उन्हें सोवियत संघ के आखिरी दिनों में वहां के आखिरी राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव पूर्व द्वारा डेमिर्गुस पीस इंटरनेशनल अवॉर्ड, मदर टेरेसा की तरफ से नेशनल सिटीजंस अवॉर्ड और राजीव गांधी राष्ट्रीय सद्भावना पुरस्कार (2009), अबूजहबी में सैयदियाना इमाम अल हसन इब्न अली शांति सम्मान (2015) से भी सम्मानित किया गया था। मोदी सरकार द्वारा दिए गए पद्म विभूषण के सम्मान के अलावा उन्हें साल 2000 में वाजपेयी सरकार ने पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।

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