Wednesday , August 4 2021

खैरुद्दीन पाशा बारबरोसा एक महान योद्धा

अगर यह सवाल किया जाए कि इस्लामी इतिहास के बड़े योद्धाओं का नाम बताएं जिन्होंने अपनी बहादुरी व युद्ध कला की छाप छोड़ी तो लोग हज़रत खालिद बिन वलीद से शुरू हो कर तारिक़ बिन ज़ियाद मोहम्मद बिन कासिम सुल्तान सलाहुद्दीन अययूबी से होते हुए सुल्तान टीपू तक पचासों लोगों का नाम गिना देंगे लेकिन अगर कहा जाए कि ऐसे योद्धाओं का नाम बताएं जिन्होंने समुद्री युद्ध में अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया तो शायद एक दो नाम भी न बता पाए। आईए हम आप को एक ऐसे ही योद्धा से मिलाते हैं जिन्हें हम ने भुला दिया पर पश्चिमी दुनिया भुल न सकी आज भी हालीवुड मूवीज़ में समुद्री डाकुओं का सरदार एक लाल दाढ़ी वाला होता है और उस का नाम अधिक तर कैप्टन बारबरोसा होता है।

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पश्चिमी देशों में अपने विरोधियों को बदनाम और उन्हें बेइज्जत करने का चलन रहा है अंग्रेज अपने कुत्ते का नाम टीपू रखते रहे हैं उसी तरह खैरुद्दीन पाशा उर्फ बारबरोसा को समुद्री डाकू बना दिया। खैरुद्दीन पाशा का असल नाम खिज्र और पिता का नाम याकूब था बाद में उन्होंने अपना नाम बदल कर खैरुद्दीन पाशा रख लिया इनके पिता उस्मानी फौज में सैनिक थे जो एजियन समुद्र के एक टापू मिडल्ली पर कार्यरत थे आज यह टापू ग्रीक का हिस्सा है। वहीं उन्होंने एक ईसाई विधवा कैटराइन से शादी कर ली उनके चार बेटे और दो बेटियां हुईं बेटों के नाम इस्हाक, उरूज, इलियास और खिज्र था।

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खैरुद्दीन पाशा का जन्म सन् 1478 में हुआ इन चारों में बड़े यानी इस्हाक उस जमाने के दस्तूर के मुताबिक कुरआन हिफज़ करके आलिम बनें और बाकी तीनों ने समुद्री रास्ते से व्यापार शुरू किया और जल्द ही खुद का एक समुद्री जहाज खरीद लिया। एक भाई उरूज की दाढ़ी के बाल लाल थे, जिसके कारण यूरोपीय लोगों ने उन्हें बारबरोसा कहना शुरू किया जो इटली भाषा का शब्द है। जिसका अर्थ लाल दाढ़ी वाला होता है और आगे चलकर खैरुद्दीन पाशा को भी बारबरोसा कहा जाने लगा।

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यह वह जमाना था जब स्पेन और पुर्तगाल बहुत बड़ी ताकत थे। स्पेन में मुसलमानों की हुकूमत सिर्फ एक शहर तक बाकी बची थी वह भी किसी एक धक्के की मोहताज थी। स्पेन वाले आगे बढ़ कर आए दिन अल्जीरिया व मोरक्को पर हमला करते थे और वहां के मुस्लिम शासकों से जम कर लगान वसूल करते थे। आस पास छोटे टापूओं पर कब्ज़ा करके मुस्लिम व्यापारियों के व्यापार का रास्ता बंद कर दिया था।

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यहीं खैरुद्दीन पाशा के बड़े भाइयों उरूज व इलियास का टकराव स्पेन व पुर्तगाल की सेना से हुआ इन भाइयों की ताकत कम थी कहां छोटे छोटे व्यापारी और कहां दो बड़े देशों की सेना इन्होंने गोरिल्ला जंग शुरू की अचानक हमला करते और नुकसान पहुंचा कर भाग जाते जिसके कारण सेना में इनका डर बैठ गया सेना के लोग इन्हें समुद्री डाकू कहने लगे जो आज तक चला आ रहा है हालांकि इन लोगों का डकैती से कोई लेना-देना नहीं था।

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धीरे धीरे इनकी ताक़त बढ़ने लगी और इन्होने कुछ टापूओं पर अपनी सरकार बना ली इनकी बढ़ती ताकत को देख कर स्पेन व पुर्तगाल ने दूसरे देशों की मदद लेकर हमला किया जोरदार लड़ाई हुई और खैरुद्दीन पाशा के भाइयों की हार हुई दोनों भाई यानी उरूज व इलयास शहीद कर दिए गए।

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भाईयों की शहादत के बाद भी खैरुद्दीन पाशा रुके नहीं वह अपने काम में लगे रहे वह उस छेत्र के मुसलमानों के लिए किसी हीरो से कम ना थे रोज़ उनकी ताकत बढ़ती जा रही थी जिसके कारण अल्जीरिया के शासकों ने मिलकर इनसे लड़ाई छेड़ी जिसमें खैरुद्दीन पाशा की जीत हुई और अल्जीरिया पर इनका कब्जा हो गया उस समय असतंबूल तुर्की में सुल्तान सलीम की हुकूमत थी खैरुद्दीन पाशा ने अपने देश को उनसे जोड़ते हुए अल्जीरिया को उस्मानी सम्राज्य का हिस्सा बना दिया सुल्तान सलीम ने इन्हें अल्जीरिया में ही रहने को कहा और वहां का गवर्नर नियुक्त किया सन 1518 से 1533 तक यह अलजीरिया के गवर्नर रहे।

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सुल्तान सलीम के इंतकाल के बाद उनके बेटे महान् सुलेमान कानूनी सुल्तान व खलीफा बनें उन्होंने बेलग्रेड पर विजय प्राप्त की और उसके बाद स्पेन पर हमला करना चाहा जिसके लिए उन्हें जल सेना मजबूत करने की जरूरत पड़ी इस काम के लिए खैरुद्दीन पाशा से अच्छा कौन हो सकता था उन्हें अल्जीरिया से बुला कर अमीरुल बहर ( ऐडमिरल , जल सेना अध्यक्ष ) बना दिया।

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यहां से खैरुद्दीन पाशा की असल जिंदगी शुरू हुई उन्होंने कामयाबी के वह क्रीतमान स्थापित किए जिसने उन्हें इस्लामी इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री योद्धा बना दिया इनके बेटे हसन बिन खैरुद्दीन भी बहुत बड़े योद्धा थे लेकिन वह भी अपने पिता की ऊंचाइयों को न पहुंच सकें।

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इनका सब से बड़ा काम बरोज़ा की जंग थी जिसमें एक ओर युरोप के देशों की संयुक्त सेना थी और दूसरी ओर उस्मानी ख़िलाफत की अकेली सेना फिर भी जीत उसमानियों की हुई यूरोप के 600 समुद्री जहाजों और नावों पर कब्जा और 30000 यूरोपीय सैनिक गिरफ्तार कर लिए गए जबकि उस्मानी सेना को किसी एक जहाज़ या नाव का भी नुक्सान नहीं उठाना पड़ा।

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दूसरा बड़ा काम इनका अंदुलुस से मुसलमानों को सुरक्षित निकालने का था इन्होंने 36 जहाजों के साथ वहां से लगभग 70 हज़ार मुसलमानों को निकाल कर अल्जीरिया में बसाया।  इनका तीसरा बड़ा काम फ्रांस की मदद थी एक बार फिर इन्होंने इटली के नेतृत्व वाली कई यूरोपीय देशों की संयुक्त सेना को हराकर उनके कब्जे में फ्रांस के शहरों को आजाद कराया। आखिर जुलाई 1546 में इनका इंतेकाल हो गया।

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खिज्र बिन याकूब उर्फ खैरुद्दीन पाशा उर्फ बारबरोसा हमारी तारीख का वह रोशन सितारा हैं जिनकी चमक सुल्तान सलाहुद्दीन अययूबी , सुल्तान मोहम्मद फातेह , सुल्तान बायजीद यलदरम और खुद महान सुलेमान कानूनी से किसी तरह कम नहीं है।

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