Monday , June 1 2020

mother’s day special : इस लॉकडाउन माँ अपने बच्चों की ताकत बनकर लड़ीं

ये तस्वीर महाराष्ट्र के औरंगाबाद के एक जिला अस्पताल की है। यहां 23 अप्रैल को एक कोरोना पॉजिटिव मां ने बच्चे को जन्म दिया था। कोरोना की वजह से दोनों को अलग-अलग वॉर्ड में रखा गया था। इसीलिए मां ने वीडियो कॉलिंग के जरिए अपने बच्चे को देखा। महाराष्ट्र पूरे देश में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है। यहां अब तक कोरोना के 19 हजार से ज्यादा मामले आ चुके हैं। 730 से ज्यादा मौतें भी हो चुकी हैं।

ये तस्वीर महाराष्ट्र के औरंगाबाद के एक जिला अस्पताल की है। यहां 23 अप्रैल को एक कोरोना पॉजिटिव मां ने बच्चे को जन्म दिया था। कोरोना की वजह से दोनों को अलग-अलग वॉर्ड में रखा गया था। इसीलिए मां ने वीडियो कॉलिंग के जरिए अपने बच्चे को देखा। महाराष्ट्र पूरे देश में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है। यहां अब तक कोरोना के 19 हजार से ज्यादा मामले आ चुके हैं। 730 से ज्यादा मौतें भी हो चुकी हैं।

सबसे पहले बात चीन के वुहान में हुई एक स्टडी की। जामा पीडिएट्रिक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वुहान में 33 बच्चे संक्रमित मां से पैदा हुए थे। जिनमें से तीन को छोड़कर सभी स्वस्थ्य थे। जो तीन संक्रमित थे उनमें से 2 बच्चे 6 दिन के होने से पहले ही ठीक भी हो गए थे।

इस रिपोर्ट का जिक्र इसलिए क्योंकि वुहान वह जगह है जहां से कोरोना संक्रमण की शुरुआत हुई। और वहां की ये रिसर्च बताती है कि मां मुश्किल वक्त में मजबूत साबित होती है। और अपनी हिम्मत से बच्चों की सुरक्षा करती है। मेडिकल साइंस ये बात माने या न माने ये तस्वीरें यही कहानी कह रही हैं…

राजस्थान के बांसवाड़ा की जाकिया अब्दुल रहमान 13 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती हुई थी। वो गंभीर रुप से कोरोना से संक्रमित थी। 5 मई को सिजेरियन डिलीवरी से उसे बेटी हुई। यह उसका पहला बच्चा था। लेकिन, 5 दिनों तक बच्ची को छूना तो दूर, जाकिया उसे देख भी नहीं पाई थी। 5 दिन बाद जब जाकिया ने अपनी बेटी को छुआ तो कहा कि मुझे जन्नत मिल गई। जाकिया ने बेटी का नाम सहर रखा है।
ये तस्वीर राजस्थान के बांसवाड़ा की हैं। यहां के कुशलगढ़ के रहने वाले सैफुद्दीन अली, उनकी पत्नी जैनब, 4 साल की बेटी और माता-पिता सभी की कोरोना रिपोर्ट 9 अप्रैल को पॉजिटिव आई। लेकिन, 9 माह की जायरा की रिपोर्ट निगेटिव थी। नन्ही जायरा संक्रमित मां की बिना नहीं रह पा रही थी। इसलिए जैनब ने पूरी सुरक्षा के साथ जायरा को अपने पास ही रखा। जायरा की कई बार जांच हुई, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव ही रही। ये शायद मां की अदृश्य ताकत ही थी, जिसने जायरा को बचाए रखा।
चंडीगढ़ पीजीआई में कोरोना संक्रमित 18 महीने की बच्ची के साथ 20 दिन तक एक ही बेड पर रहकर भी मां संक्रमण से बची रही। 18 माह की चाहत 20 अप्रैल को संक्रमित मिली थी। 17 दिन में तीन बार बेटी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। लेकिन, मां की रिपोर्ट हर बार निगेटिव रही। शनिवार को बेटी की भी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद छुट्टी दे दी गई। पीजीआई इस पर रिसर्च करवाएगा कि इतने करीब रहकर भी मां संक्रमण से कैसे बची रही।
तस्वीर वियतनाम के हनोई शहर की है। यहां एक मां ने अपने छोटे बच्चे को कोरोना से बचाने के लिए शील्ड पैक कर दिया है। यहां अब तक कोरोना के सिर्फ 288 मरीज मिले हैं। अच्छी बात ये है कि यहां कोरोना ने अब तक किसी की जान नहीं ली।
तस्वीर इंडोनेशिया के जावा शहर की है, जिसे 1 अप्रैल को खींचा गया था। इस तस्वीर में जो दिख रही हैं, वो हैं 35 साल की युका, जो अपने 12 दिन के बेटे को गोद में खिला रही हैं। कोरोना की वजह से इंडोनेशिया के अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के साथ सिर्फ एक व्यक्ति को ही जाने की इजाजत है। यहां अब तक करीब 13 हजरा 700 केस और 950 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। अब जाते-जाते इस बच्चे का नाम भी जान लीजिए। युका ने इसका नाम एलजुना सतरिया नुगरोहो रखा है।
मां पहले बच्चों को खिलाती है, फिर खुद खाती है। ये तस्वीर इसका सटीक उदाहरण है। कोलकाता की ये तस्वीर 5 अप्रैल को ली गई थी। लॉकडाउन की वजह से मजदूरों और छोटे कामगारों का काम ठप हो गया। लेकिन, उसके बाद भी मां कहीं से खाना लेकर आई और अपनी दोनों बेटियों को दे दिया। बड़ी बेटी भी इतनी समझदार कि पहले अपनी छोटी बहन को खिला रही है।
तस्वीर श्रीनगर की है। यहां एक मां 14 दिन का क्वारैंटाइन पीरियड पूरा करने के बाद जब 6 अप्रैल को बाहर आई, तो अपने बच्चे को गोद लेने से पहले मास्क और ग्लव्स पहनना नहीं भूली। जम्मू-कश्मीर में 9 मई तक 823 केस आ चुके हैं। जबकि, 9 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
तस्वीर ब्राजील की है। कोरोना को फैलने से रोकने के लिए यहां की सरकार ने गरीब बेघरों को शेल्टर होम में रखा है। शेल्टर होम के गेट से झांकता ये बच्चा शायद यही सोच रहा होगा कि कब यहां से बाहर निकलूंगा। ब्राजील में अब तक 1.5 लाख कोरोना मरीज आ चुके हैं। संक्रमण से अब तक 10 हजार से ज्यादा की मौत भी हो चुकी है।
कोरोना से बचने का तरीका है- मास्क पहनना। लेकिन, जब मास्क नहीं मिला तो फिलीस्तीनी मां ने अपने बच्चों को सब्जी के पत्तों से बना मास्क ही पहना दिया। फिलीस्तीन में अब तक 400 से भी कम मामले आए हैं। जबकि, सिर्फ 4 मौतें ही यहां कोरोना से हुई है।
कोरोना की वजह से लॉकडाउन है और सैलून बंद पड़े हैं। ऐसे में ब्रिटेन के कील शहर में रहने वाली मां ने खुद ही कंघा-ट्रिमर लिया और बच्चे के बाल कटने शुरू कर दिए। यूरोपीय देशों में ब्रिटेन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां अब तक 2.10 लाख से ज्यादा मामले आ चुके हैं। जबकि, 31 हजार मरीज दम तोड़ चुके हैं। 
तस्वीर थाईलैंड के बैंकॉक शहर की है। चीन के जिस वुहान शहर से कोरोना निकला, वहां से बैंकॉक की दूरी 2.5 हजार किमी से भी कम है। फिर भी यहां अब तक 3 हजार के आसपास ही मरीज मिले हैं और 56 मौतें हुई हैं। अब यहां धीरे-धीरे सब नॉर्मल भी हो रहा है। इस तस्वीर को देखकर तो यही लग रहा है कि मानो अपनी मां का हाथ थामे बच्ची कोरोना को बोल रही हो कि जब तक मां है, तब तक तू मुझे छू भी नहीं सकता।
तस्वीर लेबनान के सिडोन शहर की है। कोरोना उसकी मां को छू भी न सके, इसके लिए बच्चा खुद अपनी मां को मास्क पहना रहा है। यहां अब तक करीब 800 केस मिल चुके हैं। 26 लोगों ने कोरोना की वजह से दम भी तोड़ दिया है।
तस्वीर फिलीपींस के मनीला शहर की है। गरीब बेघरों को कोरोनावायरस से बचाने के लिए सरकार ने यहां के एक स्कूल को शेल्टर होम में तब्दील कर दिया है, जहां इन लोगों को ठहराया गया है। ऐसे ही एक शेल्टर होम में ठहरी एक मां मास्क पहनकर अपने बच्चे को दूध पिला रही है। फिलीपींस में अब तक 10 हजार से ज्यादा कोरोना के मामले आ चुके हैं। इससे अब तक यहां 700 से ज्यादा मौतें भी हुई हैं।

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