Monday , August 3 2020

क्यों भुला दिया गए जिन्ना को चुनौती देने वाले अब्दुल क़य्यूम अंसारी

अब्दुल क़य्यूम अंसारी

 

अब्दुल क़य्यूम अंसारी एक ऐसी शख़्सियत का नाम है जिसने जिन्ना की पाकिस्तान की मुहिम की काट के लिए मोमिन कांफ्रेंस बनाई। 1946 में मुस्लिम लीग के ख़लाफ़ चुनाव लड़कर 6 सीटें जीतीं। पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कशमीर को आज़ाद कराने के लिए मुस्लिम नौजवानों का संगठन बनाया…फिर आख़िर ऐसी अज़ीम शख़्सियत को क्यों भुला दिया गया?

“एक जुलाहा पठान से इतना डर गया

मोटर से उतरा और वहीं पे मर गया।”

ये तुकबंदी बिहार के एक मौजूदा विधायक के नाना ने 1973 में की थी। ‘बाबा-ए-क़ौम’ हज़रत अब्दुल क़य्यूम अंसारी के बारे में। अब्दुल क़य्यूम अंसारी वो अज़ीम शख़्सियत रहें हैं जिन्होंने जिन्ना की सांप्रदायिक राजनीति औऱ धर्म के आधार पर अलग देश पाकिस्तान बनाने की कोशिशों का डट कर विरोध किया था। जिस ज़माने में मुस्लिम लीग ख़ुद को देश के मुसलमानों की अकेली ठेकेदार समझ रही थी उसी ज़माने में अंसारी ने उसे चुनाव में चुनौती दी। बिहार विधान सभा में 6 सीटें जीतकर यह साबित कर दिया सब मुसलमान जिन्ना के पीछे नहीं हैं। तब चुनाव पृथक निर्वाचन प्रणाली से हुए थे। यानि हिंदू समाज ने हिंदू उम्मीदवारों को वोट दिया और मुसलमानों ने मुस्लिम उम्मीदवारों को।

यह भी पढ़ें : वीर अब्दुल हमीद ने पाकिस्तान टैंकों को किया था तबाह

आज ‘बाबा-ए-क़ौम’ हज़रत अब्दुल क़य्यूम अंसारी के 115वां जन्म दिन है। इस मौक़े पर देश समाज और वंचितों के हक़ की लड़ाई लड़ने वाली इस अज़ीम शख्सियत को याद करना प्रासांगिक होगा। उनकी पैदाइश 1 जुलाई 1905 को हुई थी। उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर ज़िले के नवली गांव में। बाद में उनका परिवार बिहार के डेहरी आन सोन चला गया। उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई सासाराम में की। बाद में उच्च शिक्षा के लिए अलीगढ़ और कलकत्ता (अब कोलकाता) और इलाहबाद (अब प्रयागराज) तक का सफ़र तय किया। उनका ताल्लुक़ एक धनी परिवार से था। लेकिन आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने शान-ओ-शौक़त छोड़कर सादगी की ज़िंदगी अपनी ली थी।

बहुत कम उम्र में उन्होंने खुद को आज़ादी की लड़ाई में झोंक दिया था। वो 16 साल की उम्र में जेल भी गए। दरअसल हुआ यह कि कांग्रेस के आह्वान पर उन्होंने सरकारी स्कूल छोड़ दिया। उनके साथ तमाम बच्चों ने भी सरकारी स्कूल छोड़ा। ऐसे बच्चों के लिए उन्होंने एक स्कूल की स्थापना की। यह घटना असहयोग और खिलाफत आंदोलन के दौरान की है। इन आंदोलनों में हिस्सा लेने की वजह से ही उन्हें कम उम्र में गिरफ़्तार करके जेल भेजा गया। जेल से छूटने के बाद भी उनका आंदोलनों में हिस्सा लेना जारी रहा। इसी वजह से उन्हें अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा।

उन्होंने एक युवा नेता के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ मिलकर काम किया। 1928 में कलकत्ता की अपनी यात्रा के दौरान साइमन कमीशन के ख़िलाफ़ छात्रों के आंदोलन में हिस्सा लिया। उन्होंने मुस्लिम लीग की सांप्रदायिक नीतियों का खुलकर विरोध किया। वो भारत को विभाजित करके पाकिस्तान बनाने की मुस्लिम लीग की मांग के ख़िलाफ़ थे। मुस्लिम लीग से मुकाबले के लिए उन्होंने ‘मोमिन आंदोलन’ शुरू किया। इस बैनर के तहत उन्होंने सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से पिछड़े मोमिन समुदाय के उत्थान और उत्थान के लिए काम किया, जो उस समय भारत की मुस्लिम आबादी का कम से कम आधा था।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस का यूपी में मज़बूत होना बसपा सपा की सेहत के लिए ठीक नही

अब्दुल क़य्यूम अंसारी जीवन भर अखिल भारतीय मोमिन कांफ्रेस के अध्यक्ष रहे। मोमिन आंदोलन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया जिसे वह एक अखंड भारत के लिए और सामाजिक समानता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की स्थापना और विकास के लिए लड़ रहे थे। उन्होंने कारीगर और बुनकर समुदायों के कल्याण के लिए और देश के कपड़ा उद्योग में हथकरघा क्षेत्र के विकास के लिए भी काम किया। बिहार की राजनीति में ग़रीब, पिछड़े और दलितों के मसीहा के रूप में उभरे अब्दुल कयूम अंसारी ने शिक्षा और साक्षरता के प्रसार के लिए काम किया। उन्हीं की कोशिशों से 1953 में पहला अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग आयोग गठित किया गया था।

अब्दुल कय्यूम अंसारी एक कुशल पत्रकार, लेखक और शायर भी थे। वह उर्दू साप्ताहिक ‘अल-इस्लाह’ (द रिफॉर्म) और एक उर्दू मासिक “मसावत” (समानता) के संपादक थे। उनके अख़बारों के नाम से ही उनकी विचारधारा के पता चल जाता है। वो पूरे समाज को बराबरी पर लाना चाहते थे। ख़ासकर कमज़ोर वर्गों को आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक रूप से मज़बूत बनाने के हक़ में थे। इसके लिए उन्होंने जी तोड़ संघर्ष किया। आज़ादी से पहले आंदोलनों के ज़रिए और आज़ादी के बाद सरकार के मंत्री के रूप में दबे कुचले समाज के उत्थान के लिए भरसक प्रयास किए।

अब्दुल क़य्यूम अंसारी सही मायनो में जनता के नेता थे। विशेष रूप से वंचित और ग़रीब लोगों में सबसे क़रीब थे। वह अपनी मृत्यु तक कांग्रेस के सच्चे और वफ़ादार नेताओं में से एक थे। वह लगभग सभी मुख्यमंत्रियों के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रह चुके थे। वह सभी समुदाय के ग़रीबों के महान मसीहा थे। यह वह हैं जिन्होंने बिहार के लगभग सभी जिलों में ग़रीब छात्रों के लिए छात्रावास और मुफ्त भोजन की स्थापना की थी। उन्हीं की शुरु क गई इस योजना को आज केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर पूरे भारत में मिड डे मील योजना के नाम से चला रही हैं।

यह भी पढ़ें : अब तेरा क्या होगा पेटीएम?

उनकी पार्टी मोमिन कांफ्रेस ने 1946 का आम चुनाव लड़ा। मुस्लिम लीग के ख़िलाफ़ बिहार विधानसभा में छह सीटें जीतने में कामयाब रही। इस प्रकार वे बिहार केसरी श्री कृष्ण सिंह के मंत्रिमंडल में बिहार के मंत्री बनने वाले पहले मोमिन बन गए। युवा मंत्री के रूप में वो बिहार केसरी श्री बाबू और बिहार विभूति अनुग्रह बाबू दोनों के विश्वास पात्र बन रहे। बाद में उन्होंने मोमिन कांफ्रेस को एक राजनीतिक संस्था के रूप में भंग कर दिया। इसे एक सामाजिक और आर्थिक संगठन बना दिया। ख़ुद कांग्रेस में शामिल हो गए। वो लगभग 17 वर्षों तक बिहार मंत्रिमंडल में मंत्री रहे और विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों को संभाला। निस्वार्थ सेवा और ईमानदारी से अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाया।

अक्टूबर 1947 में जब क़बालियों के भेष में पाकिस्तान मे कश्मीर पर हमला कियो तो उसकी निंदा करने वाले वो पहले मुस्लिम नेता थे। उन्होंने भारत के मुसलमानों को देश के सच्चे नागरिकों के रूप में पाकिस्तान की तरफ किए गए इस आक्रामण का मुक़ाबला करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने 1957 में पाक अधिकृत कश्मीर को ‘आज़ाद’ करने के लिए ‘भारतीय मुस्लिम युवा कश्मीर मोर्चा’ की स्थापना की। बाद में, उन्होंने सितंबर 1948 के दौरान हैदराबाद में रजाकारों के भारत विरोधी विद्रोह में भारत सरकार का समर्थन करने के लिए भारतीय मुसलमानों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह भी पढ़ें : SAMLA ने नासिर अजीज को चुना अपना नया अध्यक्ष

अफ़सोस की बात यह है कि भारतीय समाज ख़ासकर मुस्लिम समाज ने स्वतंत्रता सेनानी, सच्चे देशप्रेमी, समाज सुधारक और हमेशा वंचितों के हक़ की आवाज़ उठाने वाली इस शख़्सियत को भुला दिया। जिस व्यक्ति ने देश के लिए क़ुर्बानी दी। जिन्ना के ‘टू नेशन फार्मूले’ का डटकर मुक़ाबला किया हो उसे भुला दिया गाया। 1 जुलाई 2005 को, भारत सरकार ने आज़ादी का लड़ाई और सामाजिक उत्थान में उनके योगदान को याद करते हुए डाक टिकट जारी किया। बेहतर तो ये होता कि गंगा-जमुनी तहज़ीब को क़ायम करने के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश में उनके नाम से केंद्रीय विश्वविद्यालय खोला जाता।

अब सवाल यह उठता है कि आख़िर एक अज़ीम शख़्सियत को आख़िर क्यों भुला दिया गया? क्या सिर्फ़ इस लिए कि उनका ताल्लुक़ समाज के कमज़ोर तबक़े से था और कमज़ोर तबक़ो को बराबरी और सम्मान दिलाना चाहते थे। समाज में बराबरी के विरोधी ब्राह्मणवादी सोच के लोगों ने उनके विचारों और उनके योगदान पर लहमेशा पर्दा डालने की कोशिश की। बिहार में पसमांदा राजनीति के अगुवा पूर्व सांसद अली अनवर ने अपनी किताब मसावाकत की जंग में विस्तार से बताया है कि अशराफ़िया तबक़े के मुस्लिम नेताओं के साथ ही ग़ैर अंसारी पिछड़े तबक़े मुस्लमि नेता अब्दुल क़य्यूम अंसारी के बारे में कितनी घटिया सोच रखते थे।

मसावात की जंग के पेज न. 143 पर अली अनवर लिखते है, ‘ग़ुलाम सरवर (बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष) ने एक इंटरव्यू में स्व. अब्दुल क़य्यूम अंसारी को तत्कालीन मुख्यमंत्री बी के सहाय का ‘चमचा नंबर वन’ बताते हुए कहा है कि अंसारा को चमचागिरी के एवज में केबिनेट मंत्री का पद मिल गया था। क़य्यूम अंसारी आज़ादी से पहले अर्थात 1946 में केबिनेट मंत्री थे। पूरा देश जानता है कि वह अगर केबिनेट मंत्री थे तो किसी श्री बाबू, केबी सहाय या केदार पांडे के रहमोकरम पर नहीं बल्कि अपने जनाधार और आज़ादी की लड़ाई में अपने योगदान के चलते। मंत्री का ओहदा उनके लिए बहुत छेटा था।’

यह भी पढ़ें : हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम के महल की कहानी

कांग्रेस के पुराने लोग बताते है कि 1973 में तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अब्दुल क़य्यूम अंसारी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने का मन बना लिया था। दिल्ली में सब कुछ तय हो गया था। उन्हें शपथ लेने का तैयारी करने को कह कर पटना भेज दिया गया था। लेकिन उसी समय एक हादसा हो गया। डेहरी-अराहा नहर का बंध टूटने से अमियावर गाँव में बाढ़ आ गई। वो हालात का जायज़ा लेने गए थे। गाँव को हुए नुकसान का निरीक्षण करने और बेघर लोगों को राहत पहुंचाने के दौरान ही अचानक हार्ट अटेक से 18 जनवरी 1973 को उनकी मृत्यु हो गई। यबह भी कहा जाता है कि उन्हें पता चल गया था कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फैसला पलटा जा चुका है। इसी सदमे में उनकी मौत हुई। इसी वजह से पठान नेता ने वो तुकबंदी थी जिसका ज़िक्र मे ने शुरु में किया है।

बहरहाल अब्दुल क़य्यूम अंसारी और उनकी विचारधार आज और भी प्रासंगिक है। देश भर में बरसों से हाशिए पर रहे पिछड़े तबक़े के मुसलमान यानि पसमांदा मुसलमान अब राजनीति की मुख्यधारा में शामिल होकर केंद्र और राज्यों की सत्ता में अपनी हिस्सदारी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए अब्दुल क़य्यूम अंसारी मशाल-ए-राह हैं। उनकी ज़िंदगी आने वाली पीढ़ियों को रास्ता दिखाती रहेगी। ऐसे सच्चे देशप्रेमी, समाज सुधारक नेता को उनके यौम-ए-पैदाइश के मौक़े पर दिल की गहराइयों से ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते हूं।

Post Source : Yusuf Ansari Facebook

Please Subscribe-
Facebook WhatsApp Twitter Youtube

PLEASE ACKNOWLEDGE

The act of charity is very noble and highly admired by Allah (SWT). Just do it for the right people.
Voice of Muslim has been conveying the message of Islam to Muslims and non-Muslims. The aim is to make people aware of the factual news of Islam and the correct Islamic message
وائس آف مسلم مسلمانوں اور غیر مسلموں تک اسلام کا پیغام پہنچاتی رہی ہے۔ اس کا مقصد لوگوں کو اسلام کی حقیقت سے متعلق خبروں اور صحیح اسلامی پیغام سے آگاہ کرنا ہے
The Voice of Muslim independent, investigative journalism takes a lot of time, money and hard work to produce. …We are relying principally on contributions from readers and concerned citizens.
Your valuable contribution can save a life or make a difference to the quality of another human life, indirectly contributing to the social & economic stability of the community at large.
برائے کرم امداد کریں! Support us as per your devotion !
www.voiceofmuslim.in (since 2017)
Voice of Muslim
Account Details-
Acount Name :- VOICE OF MUSLIM
Bank Name :- STATE BANK OF INDIA
A/c No. :- 39107303983
IFSC CODE : – SBIN0005679
PAYTM MOBILE NO. 9005000008
Please share this message in community and be a part of this mission

About Shakeel Ahmad

Voice of Muslim is a new Muslim Media Platform with a unique approach to bring Muslims around the world closer and lighting the way for a better future.
SUPPORT US

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com