Sunday , July 5 2020

चीन के सामने बेबस क्यों हैं मोदी

नई दिल्ली (हिसाम सिद्दीकी) ! मोदी सरकार बातचीत के बहाने चीन के सामने झुकती रही है, चीन की हठद्दर्मी और बेईमानी का आलम यह है कि आला अफसरान के दरम्यान बातचीत और भारतीय आर्मी चीफ जनरल एम एम नरवणे की सरहद पर मौजूदगी के दौरान उसने गलवान घाटी में जिस जगह पन्द्रह जून को भारत के बीस जवानों को शहीद किया था उसी जगह दोबारा अपना तम्बू गाड़ कर बड़ी मिकदार (मात्रा) में हथियार इकट्ठा कर लिए। इतना ही नहीं एक नई भारतीय पोस्ट डिपसांग पर भी कब्जा कर लिया। फिंगर चार से आठ तक और दौलत बाग से ओल्डी तक हमारी फौज की गश्ती पार्टी को रोकने की हरकत की है। चीन की यह तमाम हरकतें तेइस से पच्चीस जून की है।

याद रहे कि तेइस जून को भारत के वजीर खारजा (विदेश मंत्री) वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए चीन और रूस के वुजराये खारजा (विदेश मंत्रियों) के साथ मीटिंग कर रहे थे। इसी मीटिंग के दौरान चीन गलवान से लद्दाख तक लम्बी दूरी तक अपनी फौज और बड़े पैमाने पर फौजी साज व सामान इकट्ठा कर रहा था। हमारे डिफेंस मिनिस्टर रूस की राजद्दानी मास्को में चीन के डिफेंस मिनिस्टर के साथ दावत उड़ा रहे थे। इद्दर दिल्ली में नरेन्द्र मोदी आराम कर रहे थे।

चीन को वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी की हिम्मत और फैसले का अंदाजा शायद उसी वक्त हो गया था जब उन्नीस जून को आल पार्टी वीडियो कांफ्रेंसिंग मीटिंग में  वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने बगैर किसी एहसास वाले (शून्य भाव) चेहरे को दिखाते हुए सरहद पर चीन की जानिब से सफाई देते हुए कहा कि ‘न कोई हमारी सरहद में घुसा, न कोई घुसा हुआ है और न ही हमारी कोई पोस्ट किसी के कब्जे में है।’ तभी पूरे देश की समझ में आ गया था कि चीन से निपट पाना इनके बस की बात नहीं है। किसी की समझ में नहीं आ रहा है कि दुनिया की इतनी ताकतवर बहादुर फौज मुल्क के पास होने के बावजूद आखिर देश का प्राइम मिनिस्टर इतना बेबस क्यों दिख रहा है?

उन्नीस जून के मोदी के इस बयान को चीन की प्रोपगण्डा मशीनरी ने चीनी और अंग्रेजी जुबान में डब करा कर सोशल मीडिया के जरिए पूरी दुनिया में फैला दिया है। मोदी के बयान के बाद दोनों मुल्कों के आला फौजी अफसरान, वुजराये खारजा (विदेश मंत्रियों) और रूस में डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह की चीनी डिफेंस मिनिस्टर के एक ही जलसे में शामिल होने के बावजूद चीन की फौज गलवान घाटी में जहां थी लद्दाख, हाटस्प्रिंग, पेंगांगत्सो और दीगर सरहदी इलाकों में जहां थी वहीं मौजूद है दोनों मुल्कों की आखिरी बातचीत तेइस जून को हुई जिसके बाद खबर दी गई कि दोनों मुल्क अपनी फौजें पीछे हटाने पर राजी हो गए हैं।

यह कौन सा समझौता है घुसपैठ चीन ने की और फौज पीछे हटाने पर भारत रजामंदी जाहिर कर रहा है। ‘वाह मोदी वाह’ खूब हैं आप। इसी रजामंदी के दौरान खबर आ गई कि डोकलाम में चीनी फौज का जमावड़ा फिर हो गया है। चीन की यह जिद है कि भारत के जरिए एलएसी के नजदीक अपनी जमीन पर दौलतबेग, दरबुक से ओल्डी तक बनाई जा रही सड़क का काम रोक दे। हालांकि सेटेलाइट तसावीर साफ बताती हैं कि चीन ने गलवान में लाइन आफ एक्चुअल कण्ट्रोल (एलएसी) से तकरीबन दो किलोमीटर के फासले पर न सिर्फ अपनी फौज के लिए पुख्ता स्ट्रक्चर खड़े कर लिए बल्कि सोलह टैंक, तोपखाने, बड़ी मिकदार (मात्रा) में फौजी साज व सामान इकट्ठा कर रखे हैं।

कामन पेट्रोलिंग की जगह पर टेण्ट लगा रखे हैं। चीनी घुसपैठ के कम से कम सत्ताइस सबूत तो देश के वह मोदी गुलाम टीवी चैनल दिखा रहे हैं जो रात-दिन यह प्रोपगण्डा कर रहे हैं कि मोदी के सामने चीन की कोई औकात ही नहीं है। पन्द्रह जून को चीनियों ने हमारे एक कमाण्डिंग अफीसर कर्नल संतोष बाबू समेत बीस जांबाज फौजियों को शहीद कर दिया था। इस टकराव में हमारे तकरीबन सत्तर जवान जख्मी हुए दस को चीन ने पकड़ लिया था जिन्हें तीन दिन बाद छोड़ा। इसके बावजूद मोदी ने छः दिन बाद कह दिया कि हमारी सरहदों में कोई (चीन) घुसा ही नहीं।

अगर चीन ने सरहद पर शरारत नहीं की, घुसपैठ नहीं की तो हमारे फौजियों की शहादत क्या गुल्ली डंडा खेलते हुए हो गई। मुल्क के खस्ता हो चुकी मईशत (अर्थव्यवस्था) की तरह सरहदों को महफूज करने में भी मोदी नाकाम हो रहे हैं। पहली बार हालात ऐसे हुए हैं भारत को चीन, नेपाल और पाकिस्तान से एक साथ निपटना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार ही नहीं वजीर-ए-आजम की सतह से मुल्क से झूट बोला जा रहा है। पन्द्रह जून को हमारे बीस फौजियों को शहीद करने के बाद से खबर लिखे जाने तक एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा है जब चीन ने गलवान घाटी को अपना कहने की हठद्दर्मी न दिखाई हो फिर दोनों मुल्कों के सीनियर फौजी अफसरान की मुसलसल मीटिंगों का क्या मतलब है। क्या यही तय करने के लिए मीटिंगें हो रही थीं कि दोनों मुल्क अपनी-अपनी फौजों को वापस पीछे हटाएंगे।

इस किस्म का समझौता भले ही तेइस जून को हो गया था लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि खबर लिखे जाने तक चीन ने अपनी फौज को एक इंच भी पीछे नहीं हटाया था। रिटायर्ड फौजी अफसर और अब कालमनवीस अजय शुक्ला का कहना है कि चीन इस बार पूरी तैयारी के साथ सरहद पर आया इसलिए उसके पीछे हटने की कोई उम्मीद नजर नहीं आती है। उन्होने कहा कि इतनी भारी भरकम फौज के साथ चीन गलवान में कभी नहीं आया था। पन्द्रह जून को हमारे बीस फौजी शहीद हो गए उसकी जानिब से हिंसा की यह सतह भी बहुत ऊंची है। इद्दर नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने सरहदों पर चीनी घुसपैठ को हमेशा देश से छुपाया शायद मंशा यह थी कि बातचीत के जरिए मसला हल कर लेंगे फिर देश को बता कर उसका क्रेडिट ले लेंगे लेकिन हो गया सरकार की मंशा से उल्टा।

रिटायर्ड जनरल पनाग का कहना है कि सरकार सरहद की सच्चाई मुल्क से छुपा रही है। चीन हमारी तकरीबन चालीस किलोमीटर जमीन पर काबिज है और पीछे हटने को तैयार नहीं है। वह कहते हैं कि 2018 में चीन ने भारत से तकरीबन चौव्वन (54) बिलियन डालर की कमाई की है अब उसी पैसे का इस्तेमाल हमारे खिलाफ कर रहा है। डिफेंस जर्नलिस्ट संकर्षण ठाकुर लिखते हैं कि गलवान मे ही चीन हमारी तरफ आठ-दस किलोमीटर घुस कर बैठा है। सरकार देश से यह हकीकत ठीक उसी तरह छुपा रही है जैसे करगिल के वक्त शुरू में पहले छुपाया गया फिर बहुत हल्का करके पेश किया गया। आखिर में एक बड़ी जंग का सामना करना पड़ा था।

उन्होने लिखा है कि उन्नीस (19) अप्रैल को आर्मी इंटलीजेंस ने चीनी घुसपैठ की इत्तेला दी थी। तकरीबन बीस दिन बाद आठ (8) मई को दोनों मुल्कों के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर्स के दरम्यान बातचीत भी हुई थी फिर भी कुछ नहीं हुआ। प्राइम मिनिस्टर मोदी और सरकार दोनों दावा कर रहे हैं कि चीन हमारी जमीन पर कहीं नहीं घुसा है। उद्दर लद्दाख का हाल यह है कि सरहदी इलाके से लद्दाख आए थुप्स्तान वांगचुक समेत दो कारपोरेटर्स और कई दीगर लोगों ने लद्दाख में खडे होकर एनडीटीवी से कहा कि चीन ने हमारे कई इलाकों पर और चराहगाहों पर कब्जा कर लिया है जो भी बकरवाल बकरी या दीगर मवेशी चराने जाता है उसे मारकर चीनी फौजी भगा देते हैं। कई बार तो हमारे मवेशी भी उठा ले जाते है। जिन्हें वह खाते हैं।

चीन का सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स रोजाना भारत के खिलाफ जहर उगलने का काम कर रहा अक्सर तो ग्लोबल टाइम्स के जरिए चीन वजीर-ए-आजम मोदी के सीद्दे द्दमकी तक देता है। दो जून को डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने कहा था कि बडी तादाद में चीनी फौजी हमारी सरहद में दाखिल हो चुके है। फिर सत्रह (17) जून को वजीर खारजा एस जयशंकर ने कहा कि चीन के फौजी गलवान घाटी में हमारी जमीन पर कांस्ट्रक्शन कर रहे हैं और उन्नीस (19) जून को वजीर-ए-आजम मोदी कहते हैं कि हमारी सरहद में कोई घुसा नहीं है आखिर उन तीनों में कोई तो झूट बोल ही रहा है। झूटा कौन है यह कैसे  तय होगा?

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